बिहार: सुपौल में निलंबित किए गए सहकारिता पदाधिकारी, विभागीय निर्देशों की अवहेलना में लापरवाही के आरोप…

सुपौल: बिहार सरकार के सहकारिता विभाग ने सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड में पदस्थापित वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी प्रदीप कुमार को गंभीर अनियमितताओं और विभागीय निर्देशों की अवहेलना के आरोप में निलंबित कर दिया है. यह आदेश निबंधक, सहयोग समितियां, बिहार, पटना के कार्यालय से जारी किया गया है.

संयुक्त निबंधक (साख) समरेश कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रदीप कुमार के विरुद्ध कई गंभीर आरोप जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह-सहायक निबंधक, सहयोग समितियां, सुपौल द्वारा प्रतिवेदित किए गए थे. जारी आदेश के अनुसार छातापुर प्रखंड के राजेश्वरी पश्चिम पैक्स तथा धीबहा पैक्स से संबंधित मामलों में वांछित सूचना उपलब्ध कराने में गंभीर लापरवाही और भ्रामक जानकारी देने का आरोप सामने आया है.

आरोप है कि पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक के बीच पारिवारिक संबंध की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई और जानबूझकर सुनियोजित तरीके से अध्यक्ष और प्रबंधक के पति या पिता का नाम एक ही अंकित कर दिया गया. इससे वास्तविक पारिवारिक संबंध छिपाने की कोशिश की गई. विभाग का मानना है कि इस प्रकार की गलत और भ्रामक सूचना आदर्श पैक्स कार्मिक सेवा नियमावली के उल्लंघन की श्रेणी में आती है. इसके अलावा धान अधिप्राप्ति से संबंधित मामलों में भी गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया गया है. जिला सहकारिता पदाधिकारी, सुपौल द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार धान खरीद से पहले निबंधित किसानों के दस्तावेजों और कृषि विभाग के पोर्टल पर अपलोड किए गए भूमि संबंधी कागजातों का शत-प्रतिशत मिलान नहीं किया गया. किसानों द्वारा दिए गए भूमि दस्तावेज, अद्यतन लगान रसीद और घोषणा-पत्र की समुचित जांच नहीं की गई, जिससे धान खरीद प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितता की संभावना बनी रही.

इस मामले में सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, त्रिवेणीगंज अंचल द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण भी विभाग को संतोषजनक नहीं लगा. आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि चरणे पैक्स में निर्माणाधीन 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम के निर्माण कार्य की जांच में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. प्रदीप कुमार द्वारा गोदाम का भौतिक सत्यापन 14 अगस्त और 28 अगस्त 2025 को किए जाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन जांच प्रतिवेदन से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए. विभागीय अभिलेखों के अनुसार तत्कालीन वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी के पत्रों का हवाला देकर जांच का उल्लेख किया गया, जबकि वास्तविक भौतिक सत्यापन और विस्तृत जांच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया. साथ ही जिला सहकारिता पदाधिकारी, सुपौल द्वारा 19 जनवरी 2026 को गोदाम निर्माण कार्य की जांच के लिए पत्र निर्गत किए जाने के बाद भी स्थलीय जांच नहीं की गई.

आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन मनमाना और झूठा प्रतीत होता है. आरोप है कि निर्धारित एक वर्ष की अवधि में गोदाम निर्माण पूरा नहीं कराया गया, जबकि कार्य लंबे समय से बंद पड़ा रहा. इसके बावजूद वित्तीय अनियमितता या सरकारी राशि के संभावित दुरुपयोग की जांच जानबूझकर नहीं की गई.

बताया गया है कि बीसीओ की अनुशंसा पर ही 17 अगस्त 2023 को गोदाम निर्माण के लिए तीसरी किस्त के रूप में 8.42 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी. इसके बावजूद निर्माण कार्य अधूरा रहने और जांच नहीं होने के कारण सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. इसके अतिरिक्त राइस मिल में प्रतिनियुक्ति से संबंधित चावल कुटाई के प्रतिवेदन को भी समय पर प्रस्तुत नहीं करने का आरोप लगाया गया है. निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, मगध प्रमंडल, गया का कार्यालय निर्धारित किया गया है.

इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश अनुशासनिक प्राधिकार की स्वीकृति के बाद जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू होगा.

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