पुरानी पेंशन योजना की मांग फिर तेज, 8वें वेतन आयोग के बीच बढ़ी बहस

सरकारी कर्मचारियों की ओर से पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। 8वें वेतन आयोग को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कर्मचारी संगठनों ने सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा और सुनिश्चित पेंशन को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए ओपीएस की वापसी की मांग दोहराई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पूरी तरह ओपीएस लागू करना आसान नहीं होगा।
कर्मचारी संगठनों ने बताई ओपीएस की जरूरत
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पुरानी पेंशन योजना से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को जीवनभर निश्चित पेंशन और महंगाई भत्ते का लाभ मिलता है। उनके अनुसार ओपीएस सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है। संगठनों ने दावा किया कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में मिलने वाली पेंशन बाजार के प्रदर्शन और जमा कोष पर निर्भर करती है, जिससे कई कर्मचारियों को अपेक्षाकृत कम पेंशन मिलती है।
एनपीएस से ओपीएस में वापसी क्यों चुनौतीपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले लगभग दो दशकों में एनपीएस के तहत कर्मचारियों और सरकार का 16.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कोष जमा हो चुका है। यह राशि विभिन्न वित्तीय संस्थानों और निवेश योजनाओं में लगाई गई है। ऐसे में एनपीएस को पूरी तरह समाप्त कर ओपीएस लागू करने से वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर कई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इसके अलावा निवेश प्रवाह और बाजार की तरलता पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
8वें वेतन आयोग पर टिकी कर्मचारियों की नजर
पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया को छह महीने पूरे हो चुके हैं। आयोग की सिफारिशों का असर केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनरों पर पड़ेगा। ऐसे में पेंशन व्यवस्था को लेकर उठ रही मांगों और सुझावों पर आयोग की संभावित भूमिका को लेकर कर्मचारियों के बीच उत्सुकता बनी हुई है।











