7वें बड़े मंगल पर कैंची धाम में लगेगा आस्था का महामेला… जानें लक्ष्मण नारायण शर्मा से कैसे बने बाबा नीम करौली?

उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में बसा नैनीताल जिले का कैंची धाम में नीम करौली बाबा के भक्तों के लिए खास स्थान रखता है. क्योंकि कैंची धाम की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं है. दुनिया के कई देशों से लोग यहां पहुंचते हैं. विराट कोहली और अनुष्का शर्मा, मार्क जुकरबर्ग समेत कई प्रसिद्ध हस्तियों ने बाबा नीम करौली के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की है. इस साल 15 जून का दिन कैंची धाम के इतिहास में और भी ज्यादा खास होने जा रहा है. हर साल 15 जून को यहां बाबा नीम करोली महाराज के भक्तों का तांता लगता है, क्योंकि इसी दिन साल 1964 में इस पावन धाम की स्थापना हुई थी.

लेकिन इस बार का संयोग बेहद अद्भुत है. अधिकमास के चलते इस साल 7वां बड़ा मंगल 16 जून को पड़ रहा है, यानी स्थापना दिवस के ठीक अगले दिन. बाबा नीम करौली के भक्त उन्हें संकटमोचन हनुमान जी का साक्षात अवतार मानते हैं, ऐसे में कैंची धाम का स्थापना दिवस और बड़े मंगल का यह दुर्लभ संयोग भक्तों के लिए किसी महापर्व से कम नहीं है. इस दो दिवसीय महामेले में लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है. आइए इस पावन अवसर पर जानते हैं बाबा के जीवन का वो दिलचस्प किस्सा, जब एक साधारण से दिखने वाले लक्ष्मण नारायण शर्मा भक्तों के दुखों को दूर करने वाले नीम करौली बाबा बन गए.

15 जून क्यों है खास?

15 जून का दिन बाबा नीम करौली के भक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी दिन साल 1964 में बाबा ने नैनीताल के निकट स्थित कैंची धाम आश्रम की स्थापना की थी. तब से हर साल इस दिन विशेष पूजा-अर्चना, भंडारा और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. कैंची धाम की ख्याति समय के साथ लगातार बढ़ती गई. आज यह स्थान दुनिया के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में गिना जाता है. यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि बाबा की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन की कठिनाइयों का समाधान मिलता है.

कौन थे बाबा नीम करौली?

बाबा नीम करौली का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में हुआ था. उनका वास्तविक नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था. बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्म और साधना की ओर था. कहा जाता है कि उन्होंने कम उम्र में ही सांसारिक मोह-माया से दूरी बनाकर आध्यात्मिक मार्ग अपना लिया था. समय के साथ वे लोगों के बीच एक सिद्ध संत के रूप में जाने लगे और फिर देश-दुनिया से लोग उनके दर्शनों के लिए आने लगे.

लक्ष्मण नारायण शर्मा से कैसे बने नीम करौली बाबा?

बाबा नीम करौली के नाम से जुड़ी एक प्रसिद्ध कहानी आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है. मान्यता के अनुसार, एक बार वे बिना टिकट ट्रेन में यात्रा कर रहे थे. टिकट जांच के दौरान रेलवे कर्मचारियों ने उन्हें ट्रेन से उतार दिया. यह घटना उस समय के नीम करौली रेलवे स्टेशन के पास हुई थी. कहा जाता है कि बाबा के ट्रेन से उतरने के बाद ट्रेन रूक गई. काफी प्रयासों के बावजूद जब ट्रेन नहीं चली तो लोगों ने बाबा को वापस बुलाने का आग्रह किया. जैसे ही बाबा दोबारा ट्रेन में सवार हुए, ट्रेन चल पड़ी. इस घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच उनकी चर्चा फैल गई और लोग उन्हें उस स्थान के नाम पर नीम करौली बाबा कहकर पुकारने लगे. धीरे-धीरे यही नाम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गया.

हनुमान भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है कैंची धाम

बाबा नीम करौली को भगवान हनुमान का परम भक्त माना जाता है. उनके आश्रमों में हनुमान जी की विशेष पूजा होती है. भक्तों का विश्वास है कि बाबा की साधना और आध्यात्मिक शक्ति का आधार उनकी हनुमान भक्ति थी. यही कारण है कि बड़े मंगल के अवसर पर कैंची धाम का महत्व और बढ़ जाता है. इस बार स्थापना दिवस और बड़े मंगल का संयोग श्रद्धालुओं के लिए इन 2 दिनों को ज्यादा खास बना रहा है.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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