महंगे तेल ने बढ़ाई चीनी गाड़ियों की मांग, EV-हाइब्रिड कारों के एक्सपोर्ट में तगड़ा उछाल

ईरान और अमेरिका-इजराइल युद्ध की वजह से भले ही पूरी दुनिया तेल की बढ़ती कीमतों से जूझ रही है, लेकिन चीन ने मौके पर चौका लगा दिया है. तेल संकट के बीच दुनियाभर में चीनी गाड़ियों की मांग में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिली है. मई 2026 में चीन का कार एक्सपोर्ट 73 प्रतिशत बढ़कर 809,000 यूनिट पर पहुंच गया है. खास बात ये है कि एक्सपोर्ट बढ़ने की वजह चीनी इलेक्ट्रिक कार और हाइब्रिड कारों की बढ़ती मांग है.
चीन के ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CAAM) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मई में इलेक्ट्रिक कार और प्लग-इन-हाइब्रिड कारों की मांग पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हुई है. पिछले महीने चीन ने इलेक्ट्रिक कार और प्लग-इन-हाइब्रिड कारों की कुल 435,000 यूनिट का एक्सपोर्ट किया है. एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में 796,000 कारों का एक्सपोर्ट किया था. यानी महीने के आधार पर भी एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी हुई है.
BYD जैसी चीनी ऑटो कंपनियां बहुत तेजी से अन्य देशों में विस्तार कर रही हैं. इन कंपनियों का सबसे बड़ा टारगेट लैटिन अमेरिका, एशिया और यूरोप हैं. खास बात ये है कि ये कंपनियां ऐसे समय में विस्तार कर रही हैं. जब इन देशों में घरेलू कंपनियां घटती बिक्री के दबाव झेल रही हैं. हालांकि,इसकी एक वजह यह है कि सरकार ने ड्राइवरों को EV अपनाने के लिए मिलने वाले इंसेंटिव कम कर दिए हैं.
चीन में घट गई बिक्री
मजेदार बात ये है कि एक ओर चीन का एक्सपोर्ट रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया, दूसरी ओर घरेलू बाजार में बिक्री घट गई है. चीन में मई महीने के दौरान घरेलू यात्री कारों की बिक्री पिछले साल की तुलना में 23.4% घटकर 14.4 लाख वाहनों पर आ गई. यह लगातार सातवां महीना है जब कार बिक्री में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई है. CAAM के अनुसार, पेट्रोल और डीजल इंजन वाली कारों की बिक्री में लगभग 42% की बड़ी गिरावट आई है. वहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है.
आगे भी जारी रहेगी ऐसी ही मांग
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में चीन की यात्री कारों के निर्यात में लगभग 40% की बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं, इलेक्ट्रिक कारों के निर्यात में करीब 80% तक की ग्रोथ देखने को मिल सकती है. तेल की बढ़ती कीमतों ने लोगों की इलेक्ट्रिक वाहनों में रुचि और बढ़ा दी है. उनका मानना है कि महंगे ईंधन के कारण अधिक ग्राहक EV खरीदने की ओर आकर्षित हो रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की मई में जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल दुनिया भर में बिकने वाली हर चार नई कारों में से एक इलेक्ट्रिक कार थी. एजेंसी का कहना है कि यह आंकड़ा आने वाले समय में और बढ़ेगा, भले ही साल की शुरुआत थोड़ी धीमी रही हो.











