मानसून 7 दिन लेट: औसत बारिश 10% कम रहने के आसार, विशेषज्ञों ने किसानों को दी बुवाई टालने की सलाह

राजस्थान में कम और अनिश्चित बारिश सबसे बड़ा फैक्टर है इसलिए बुवाई से पहले मौसम का अनुमान, जलवायु परिवर्तन और पिछले कुछ सालों में फसलों के बाजार भाव को ध्यान में रखना होगा। प्रदेश में मानसून प्राय: 25 जून तक आ जाता है, इस बार जून के अंत तक आने व बारिश में 10% कमी रहने की संभावना है।
मौसम विभाग, जयपुर के डायरेक्टर राधेश्याम शर्मा और कृषि विवि, कोटा के निदेशक डॉ. एमसी जैन ने बताया कि राजस्थान में खरीफ फसलों की खेती के लिए मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक का समय बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
अधिकांश वर्षा आधारित क्षेत्रों में कृषि विशेषज्ञ कम से कम 50 से 75 एमएम वर्षा होने के बाद ही बुवाई करने की सलाह देते हैं, ताकि मिट्टी की ऊपरी 15 से 20 सेमी परत में नमी रहे।
पहली बारिश के तुरंत बाद मिट्टी में नमी पर्याप्त न हो तो बीज का अंकुरण बिगड़ सकता है, दोबारा बुवाई की नौबत आ सकती है। दोबारा बुवाई में बीज की मात्रा 10% बढ़ानी चाहिए।
औसत बारिश के अनुसार हो फसल
कम बारिश (200 से 500 एमएम) : बाजरा, ग्वार, मूंग, तिल सहित स्थानीय फसलें। मध्यम बारिश (500 से 800 एमएम): मक्का, उड़द, सोयाबीन, मूंगफली सहित स्थानीय फसलें। सिंचित/अधिक बारिश वाले क्षेत्र : धान, कपास, मक्का, सोयाबीन सहित स्थानीय फसलें।
बारिश के बाद पारा 29 डिग्री तक संभव
अतिम सप्ताह तक मानसून की एंट्री की संभावना है। हालांकि तापमान करीब 35 डिग्री के आसपास रहने की उम्मीद है। हल्की बारिश होने से न्यूनतम तापमान दूसरे सप्ताह की अपेक्षा 2 से 3 डिग्री कम होकर 28 से 29 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
खरीफ की बुवाई से पहले यह जानना जरूरी
पहली अच्छी वर्षा (50 से 75 एमएम या उससे अधिक) के बाद ही बुवाई करना सबसे सुरक्षित माना जाता है। बहुत जल्दी बुवाई करने पर अंकुरण प्रभावित हो सकता है। बहुत देर (जुलाई अंत या अगस्त) से बुवाई करने पर उत्पादन घटने की आशंका रहती है।











