विकसित भारत की दिशा में AI का संकल्प, समर्थ भारत कॉन्क्लेव में जुटे विशेषज्ञ

रायपुर. डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय और आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में राजधानी रायपुर के होटल बेबीलोन में दो दिवसीय “समर्थ भारत कॉन्क्लेव” का शुभारंभ हुआ. 16 और 17 जून को आयोजित इस कॉन्क्लेव का विषय “Reimagining Impact: AI-Driven Skilling, Financial Inclusion and Social Enterprises for Viksit Bharat” रखा गया है. कार्यक्रम में विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, स्किल इंडिया, वित्तीय समावेशन, सामाजिक उद्यमिता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की जा रही है.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका थे. उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग मानव सेवा और मानव कल्याण के लिए होना चाहिए. किसी भी नई तकनीक के सकारात्मक उपयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है, वहीं उसके दुरुपयोग के प्रति भी समाज को सजग रहना होगा. उन्होंने कहा कि डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय और आईसेक्ट इंडिया ग्रुप द्वारा ग्रामीण युवाओं को केंद्र में रखकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कौशल रथ की शुरुआत की गई है, जो एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण पहल है.
राज्यपाल ने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता है. आईसेक्ट इंडिया ग्रुप और डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि तकनीक को जीवन में सहायक के रूप में अपनाया जाना चाहिए, न कि उसे किसी खतरे के रूप में स्थान दिया जाना चाहिए. एआई मानव का सहयोगी है, लेकिन यह मानव बुद्धि और संवेदनशीलता का विकल्प नहीं बन सकता. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली जीवनशैली को अपनाने पर भी जोर दिया. कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहिब ने कहा कि आईसेक्ट इंडिया ग्रुप पिछले चार दशकों से कंप्यूटर शिक्षा और तकनीकी जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. उन्होंने कहा कि एक समय था जब गांव-गांव में आईसेक्ट के कंप्यूटर केंद्र तकनीकी शिक्षा का प्रमुख माध्यम बने. आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आईसेक्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकारी ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से प्रदेश के युवाओं को नई तकनीकों का ज्ञान प्राप्त होगा और वे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकेंगे.
गांव-गांव तक पहुंचेगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकारी
आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि एआई कौशल रथ का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाना है. मध्यप्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में इसकी शुरुआत की गई है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में तकनीक, कौशल और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. छत्तीसगढ़ के युवा इस दिशा में उल्लेखनीय योगदान देने की क्षमता रखते हैं. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाएगा और छत्तीसगढ़ इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण भागीदार बनेगा.
सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बना AI
कार्यक्रम में डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार घोष ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालय एआई आधारित शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास को प्राथमिकता दे रहा है. उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप अपनी क्षमताओं का विकास कर सकें. उन्होंने कहा कि एआई आज केवल तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन चुका है.
कॉन्क्लेव में पद्मश्री अजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे. उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में उद्यमिता, संघर्ष और सफलता से जुड़े अपने जीवन के अनुभव साझा किए. उन्होंने ग्रामीण उद्यमियों को चुनौतियों से घबराने के बजाय अवसरों की पहचान करने और निरंतर प्रयास करते रहने की प्रेरणा दी. उनके अनुभवों ने उपस्थित प्रतिभागियों को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान किया.
दो दिवसीय कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न तकनीकी एवं विषयगत सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन, सामाजिक उद्यमिता और ग्रामीण नवाचार जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विचार रखे जा रहे हैं. कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं, उद्यमियों और समाज के विभिन्न वर्गों को नई तकनीकों से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना है. इस अवसर पर कौशल प्रशिक्षित युवाओं को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया गया.
कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज्योति बाला गुप्ता ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी ने किया. कॉन्क्लेव में बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमी, आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के अधिकारी एवं कर्मचारी, डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी, छत्तीसगढ़ शासन अधिकारी, बैंक के अधिकारी और उद्योगों के अधिकारी उपस्थित रहे. पूरे आयोजन में विकसित भारत के निर्माण में कौशल, तकनीक और सामाजिक नवाचार की भूमिका को लेकर सार्थक विमर्श देखने को मिला.











