ITR भरने के बाद भी आ सकता है आयकर विभाग का नोटिस, जानिए क्या करें और कैसे दें जवाब

31 जुलाई को आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद भी करदाताओं की जिम्मेदारी पूरी तरह खत्म नहीं होती। यदि आयकर विभाग को रिटर्न में किसी प्रकार की गड़बड़ी, आय में अंतर या दस्तावेजों में असंगति मिलती है तो वह बाद में भी नोटिस जारी कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में घबराने की बजाय नोटिस को ध्यान से पढ़कर तय समय के भीतर जवाब देना चाहिए, ताकि जुर्माने और अन्य कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।

किन कारणों से जारी हो सकता है नोटिस

आयकर विभाग आईटीआर में दर्ज आय और अपने रिकॉर्ड में अंतर मिलने, बैंक या एफडी के ब्याज की जानकारी छूट जाने, कैपिटल गेन का विवरण नहीं देने, गलत टैक्स छूट का दावा करने या फॉर्म-16, एआईएस और अन्य दस्तावेजों में असमानता मिलने पर नोटिस जारी कर सकता है। नोटिस मिलने पर सबसे पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करें और यह देखें कि वह किस प्रावधान के तहत जारी किया गया है। इसके बाद आईटीआर, फॉर्म-16, एआईएस और अन्य जरूरी दस्तावेजों से जानकारी का मिलान करें।

समय पर जवाब नहीं देने पर हो सकती है कार्रवाई

आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन कर ‘Pending Actions’ और ‘e-Proceedings’ के माध्यम से नोटिस का जवाब दिया जा सकता है। यदि करदाता विभाग की बात से सहमत है तो ‘Agree’ और असहमत होने पर ‘Disagree’ विकल्प चुनकर आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए जा सकते हैं। जवाब जमा होने के बाद ट्रांजैक्शन आईडी प्राप्त होती है, जिसे सुरक्षित रखना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, नोटिस की अनदेखी करने पर प्रति चूक 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में विभाग उपलब्ध जानकारी के आधार पर टैक्स का आकलन कर अतिरिक्त कर, पेनाल्टी और कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है। इसलिए नोटिस मिलने पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर जवाब देना सबसे सुरक्षित और उचित विकल्प माना जाता है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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