फेल हुआ ठाकरे गुट की घर वापसी का प्लान, व्हिप के बावजूद संसदीय दल की बैठक को बागियों ने दिखाया ठेंगा

महाराष्ट्र की सियासत में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को टूटने से बचाने और बागी सांसदों को वापस ‘मातोश्री’ के पाले में लाने का आखिरी दांव पूरी तरह फेल हो चुका है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ‘ऑपरेशन टाइगर’ को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे के निर्देश पर जारी किए गए कड़े ‘व्हिप’ को बागी सांसदों ने पूरी तरह से ठेंगा दिखा दिया है। नई दिल्ली में बुलाई गई शिवसेना यूबीटी के संसदीय दल की आपातकालीन बैठक में एक भी बागी सांसद नहीं पहुंचा।

जिससे यह साफ हो गया है कि अब समझौते के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं और उद्धव सेना में यह महा-विभाजन अब कानूनी रूप से अंतिम मुकाम पर है। इस महत्वपूर्ण बैठक में बागियों की गैर-मौजूदगी के बाद अब तकनीकी रूप से ‘ऑपरेशन टाइगर’ को सफल माना जा रहा है।

व्हिप के बावजूद बैठक से नदारद रहे 6 सांसद
लोकसभा में उद्धव ठाकरे गुट के कुल 9 सांसद हैं, जिनमें से दो-तिहाई यानी 6 सांसदों ने पहले ही बगावती रुख अपना रखा था। पार्टी द्वारा बुलाई गई इस लिटमस टेस्ट बैठक में केवल वही 3 सांसद मौजूद रहे, जो संकट के इस दौर में भी उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं। बैठक में शामिल होने वाले वफादार सांसदों में अरविंद सावंत, अनिल देसाई और नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे का नाम शामिल है। दूसरी तरफ, बगावत का झंडा बुलंद करने वाले 6 सांसद इस बैठक से पूरी तरह नदारद रहे, जिससे दिल्ली पहुंचे संजय राउत के डैमेज कंट्रोल प्लान को करारा झटका लगा है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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