मिठाई कारोबारी से 2 करोड़ 45 लाख की ठगी:महिला बोली-‘मेरा नाम गूगल करके देख लो, कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता; नेताओं-अधिकारियों से बातचीत का किया नाटक

जोधपुर की चर्चित लेडी डॉन सुमता विश्नोई एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार उस पर मध्यप्रदेश के एक हेड कॉन्स्टेबल के साथ मिलकर एक मिठाई कारोबारी से 2 करोड़ 45 लाख रुपए की ठगी करने का आरोप लगा है। आरोप है कि कारोबारी को भरोसे में लेने के लिए नेताओं, हाईकोर्ट के जजों और वरिष्ठ अधिकारियों से पहचान होने का दावा किया गया। यहां तक कि फोन पर फर्जी बातचीत कर प्रभावशाली पहुंच का नाटक भी किया गया।
पीड़ित पर्वत सिंह राजपुरोहित (39) ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनका निम्बाहेडा में मिठाई का कारोबार है। पिछले करीब 27 सालों से वहां रह रहे हैं। कुछ साल पहले उनकी पहचान मध्यप्रदेश के नीमच जिले के मनासा थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल राघव सिंह राजपूत से हुई थी। वह उनके रेस्टोरेंट में आता-जाता रहता था। इसके चलते उनकी जान पहचान दोस्ती में बदल गई। दोस्ती बढ़ने के बाद उसने निवेश और प्रॉपर्टी में फायदा दिलाने का भरोसा देकर फरवरी 2025 में उसे जोधपुर लाकर सुमता विश्नोई से मिलवाया था।
शिकायत के अनुसार, हेड कॉन्स्टेबल ने पीड़ित पर्वतसिंह राजपुरोहित से कहा कि वह उसे ऐसी महिला से मिलवाएगा, जिसकी बड़े बड़े अधिकारियों, नेताओं, हाईकोर्ट के जजों से अच्छी जान पहचान है। वह आपके काम चुटकियों में करवा सकती है। इसके बाद हेड कॉन्स्टेबल पर्वतसिंह को जोधपुर लेकर आया और यहां पशर्वनाथ कॉलोनी पाल बाईपास पर सुमता से मिलवाया।
रिपोर्ट में पर्वतसिंह ने बताया कि झांसे में लेने के लिए सुमता ने अपने फोन से नेताओं के नाम से फोन किया और हमारे सामने ऐसे दिखावा किया कि उसने अलग-अलग नेताओं से बड़े अधिकार से बात की है, हालांकि बाद में पता चला कि उसका एक ग्रुप है जिसके नंबर उसने मंत्रियों नेताओं और अधिकारियों के नाम से सेव करके रखे हैं, जिससे कि लोगों को गुमराह किया जा सके।
पर्वतसिंह ने कहा कि शुरूआत में हम लोग कुछ समझ नहीं पाए।
सुमता विश्नोई ने पर्वतसिंह से कहा कि चित्तौड़गढ़ के सांवरिया जी मंदिर में बनने वाला ट्रस्ट का अध्यक्ष उनका आदमी होगा इसलिए प्रसाद का ठेका वह मुझे (पर्वतसिंह) को दिला देंगे। यही नहीं सुमता विश्नोई ने यह भी कहा कि अगर कोई ट्रांसफर का काम होगा तो भी वह आसानी से करवा देगी, क्योंकि इसकी एसपी से लेकर IAS तक जान-पहचान है। इसके बाद महिला ने उसे इन्वेस्ट के नाम पर एक करोड़ 5 लाख रुपए नगद लिए। यह रकम सुमता विश्नोई के दो बेटों मनीष विश्नोई और विनोद विश्नोई को दी गई।
पर्वतसिंह ने कहा कि कुछ दिनों बाद मेरा मित्र एक जो पाटीदार समाज से आता है, वह मेरे घर आया। उसके अग्रिम जमानत का कोई काम था, उसी समय हेड कॉन्स्टेबल राघव सिंह मेरे घर पर था। राघव सिंह ने कहा कि सुमता दीदी उसकी जमानत करवा देंगी। मानवेंद्र ने पर्वतसिंह के सामने सुमता से फोन पर बात की। सुमता ने उसे फोन पर बात कर बताया कि इस काम के पैसे ले लो काम हो जाएगा। मेरी जजों से बात हो गई।
पर्वतसिंह राजपुरोहित ने कहा कि सुमता की बात का विश्वास कर हमने उसे जोधपुर आकर 1 करोड़ 40 लाख रुपए दे दिए। कुछ महीने तक तो उनके घर पर पुलिस नहीं आई, लेकिन उसके कुछ महिनों बाद उनके मित्र के बेटे अर्जुन पाटीदार को अरेस्ट कर लिया। इस पर मेरा दोस्त परिवार सहित मेरे घर आया, उसने कहा कि जब बेटे की अग्रिम जमानत करवा दी गई तो उसे कैसे पकड़ा। इस पर मैंने समुता विश्नोई को फोन किया तो समुता ने कहा कि आप चिंता मत करो पुलिस उसे जहां से पकड़कर लाई है उसे वहीं छोड़ेगी।
इसके बाद सुमता विश्नोई ने हमें दिन-भर झांसे में रखा। बाद में मेरा दोस्त पाटीदार समाज के लोगों के साथ जोधपुर सुमता विश्नोई के घर आए। तो सुमता ने कहा कि मेरी कोई बात फेल हो गई। आप थोड़ा टाइम दो आपका पैसा लौटा देंगे। ऐसा करते-करते उसने करीब 4 महिने निकाल दिए।
अक्टूबर में हम लोग फिर से सुमता विश्नोई के पास गए। तो उसने कहा कि उसके पास एक प्लॉट है, जिसे वह आपके नाम करवा देगी, जिसकी कीमत करीब 80 लाख है। फिर हम वापस चले गए।
जनवरी माह में उसकी टाइम पीरियड पूरा हो रहा था। तब हम लोग वहां वापस उसके पास गए तो उसने कहा पैसे वापस लौटाने में थोड़ा टाइम लगेगा। उसी दौरान वहां प्रकाश बिश्नोई, श्याम विश्नोई और खुद को कोर्ट कर्मचारी बताने वाला अनुरोध लोहरा मौजूद थे। उन सबने कहा कि आप इतना रुके हो तो थोड़ा दिन और रुक जाओ, हम आपको पैसा दिलवा देंगे।
पर्वतसिंह ने बताया कि इसके बाद हम वापस चले गए। बाद में सुमिता विश्नोई ने फोन उठाने बंद कर दिए। जब हम 15-20 दिन बाद वापस आए तो उसके हाव भाव चेंज हो गए।
उसने कहा कि आप कुछ भी कर लो मेरा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकेगा। आप मेरा नाम गूगल कर लो कि मैं कौन हूं। इससे वो डर गए। क्योंकि सुमता विश्नोई कई बार उनके सामने ही बोरानाडा SHO शकील अहमद से बात करती थी।
इसलिए हमें यकीन था कि पुलिस भी हमारा साथ नहीं देगी। ऐसे में हम लोग पुलिस कमिश्नर के पास गए और उन्हें आवेदन दिया।











