कैशलेस चिकित्सा योजना से सरकारी कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी राहत, इलाज के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर

राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना राहत लेकर आने वाली है। सरकार ने इस योजना का प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसके लागू होने के बाद कर्मचारियों को इलाज के लिए पहले अपनी जेब से खर्च नहीं करना पड़ेगा और न ही मेडिकल प्रतिपूर्ति के लिए वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने होंगे। स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक कर योजना का खाका साझा किया है, जिसमें इलाज के खर्च की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं रखने का प्रस्ताव है।
मौजूदा व्यवस्था में वर्षों तक अटकते हैं मेडिकल बिल
वर्तमान व्यवस्था के तहत हर साल हजारों सरकारी कर्मचारी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेते हैं। सरकार चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन कर्मचारियों को बिल पास कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई मामलों में फाइलें दो से तीन साल तक लंबित रहती हैं। नियमों के अनुसार जिला और राज्य स्तर की समितियों की नियमित बैठक होनी चाहिए, लेकिन बैठकें समय पर नहीं होने से बड़ी संख्या में मेडिकल बिल अटके रहते हैं। कई कर्मचारियों को अपने ही पैसे वापस पाने के लिए अदालत का रुख तक करना पड़ा है।
नई योजना में डिजिटल कार्ड और सीधे कैशलेस इलाज की सुविधा
नई कैशलेस चिकित्सा योजना लागू होने के बाद कर्मचारियों को मोबाइल आधारित डिजिटल मेडिकल कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। मान्यता प्राप्त अस्पतालों में भर्ती होने के लिए सरकारी अस्पताल से रेफरल की अनिवार्यता समाप्त होगी। कर्मचारी सीधे सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे और अस्पतालों को तय सरकारी दरों पर भुगतान किया जाएगा। इससे इलाज के दौरान कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और प्रतिपूर्ति की जटिल प्रक्रिया से भी राहत मिलेगी।
कर्मचारी संगठनों ने रखे अहम सुझाव
स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने योजना का स्वागत करते हुए कई सुझाव दिए। संगठनों ने मांग की कि कार्यरत कर्मचारियों के साथ पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को भी योजना में शामिल किया जाए। इसके अलावा अधिक से अधिक सरकारी और निजी अस्पतालों को पैनल में जोड़ने, पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू करने और अस्पताल में भर्ती एवं स्वीकृति प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाने पर जोर दिया गया। सरकार ने सुझावों पर विचार के बाद अंतिम योजना लागू करने की बात कही है।











