ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा: TRI ने सरकार संग मिलाया हाथ, ग्रीन इकोनॉमिक ट्रांजिशन पर फोकस

रायपुर, 06 अगस्त 2026। छठे ‘इंडिया रूरल कोलोक्वी’ (भारत ग्रामीण संगोष्ठी) के छत्तीसगढ़ चैप्टर की शुरुआत इस अपील के साथ हुई कि छोटे किसानों और महिलाओं के नेतृत्व वाले संस्थानों को ग्रामीण बदलाव की मजबूत नींव के रूप में पहचान दी जाए। ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच यह साझेदारी पूरे राज्य में समावेशी और सामुदायिक नेतृत्व आधारित ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।
रायपुर में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री के सचिव एवं ‘गुड गवर्नेंस एंड कन्वर्जेंस’ विभाग के सचिव राहुल भगत ने कहा, “छोटे किसान और स्वयं-सहायता समूहों की महिलाएँ ग्रामीण बदलाव की असली प्रेरक हैं। पहला कदम उठाने का उनका साहस असंख्य लोगों को बदलाव लाने वाला बनने के लिए प्रेरित करता है।”
ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, नया रायपुर में आयोजित इस संगोष्ठी में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सामुदायिक नेता, नागरिक समाज संगठन और विकास क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में ‘ग्रीन इकोनॉमिक पाथवेज़ – छत्तीसगढ़’ स्टडी रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें जलवायु-अनुकूल और समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए आवश्यक उपायों पर प्रकाश डाला गया।
मुख्य वक्ता पद्मश्री पुरस्कार विजेता बुद्री थाती ने स्थानीय समुदायों और प्रकृति के बीच संतुलन बहाल करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “जहाँ कभी बदलाव मुश्किल लगता था, वहाँ प्यार और सच्ची कोशिशों से बदलाव आया। हर इंसान प्यार चाहता है और उसे बस ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत होती है जो उसे सच में समझे।”
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने कहा कि टिकाऊ ग्रामीण विकास की सफलता मजबूत स्थानीय संस्थानों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, “हर सरकारी योजना का असली क्रियान्वयन गांव के स्तर पर होता है। यदि गाँव के संस्थान मजबूत नहीं होंगे, तो विकास की गति सीमित ही रहेगी।”
वर्ष 2016 में स्थापित ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) स्थानीय नेतृत्व पर आधारित समावेशी विकास के लिए ग्रामीण समुदायों के साथ कार्य कर रहा है। 2026 में अपने दूसरे दशक में प्रवेश करते हुए संस्था लैंगिक समानता, सामुदायिक नेतृत्व और सतत विकास पर विशेष फोकस कर रही है।
‘विकसित छत्तीसगढ़ के लिए जमीनी नेतृत्व’ विषय पर आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और जमीनी प्रतिनिधियों ने ग्रामीण बदलाव की अगली पीढ़ी के नेतृत्व और सार्वजनिक संस्थानों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
संगोष्ठी का प्रमुख आकर्षण ‘ग्राम संवाद: ग्रामीण भारत का भविष्य गढ़ते समुदाय’ रहा, जिसमें पहली बार नीतिगत चर्चाओं के केंद्र में समुदाय की आवाज़ को रखा गया। महिला लीडर्स, प्रगतिशील किसानों, जनप्रतिनिधियों और जमीनी संस्थानों ने आजीविका, सार्वजनिक सेवाओं और सामुदायिक सशक्तिकरण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए तथा व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए।
इसके आधार पर ‘समाधान मंथन पॉलिसी इनोवेशन लैब’ के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने सामुदायिक ज्ञान पर आधारित नीतिगत प्रस्ताव तैयार किए, जिन्हें सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और समुदाय के प्रतिनिधियों की प्रतिष्ठित जूरी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इससे स्पष्ट हुआ कि जमीनी अनुभव किस प्रकार सार्वजनिक नीति निर्माण और ग्रामीण परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
इस अवसर पर राहुल हीरेमठ, सत्य लता मिरी, हिना अनिमेष नेताम, मेनका चंद्राकर, अश्विनी देवांगन, डॉ. संजीव पाराशर सहित कई विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों को संबोधित किया।
भारत ग्रामीण संगोष्ठी के बारे में
ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) का प्रमुख आयोजन भारत ग्रामीण संगोष्ठी वर्ष 2026 में अपने छठे संस्करण के साथ आयोजित हो रहा है। वर्चुअल श्रृंखला के रूप में शुरू हुआ यह आयोजन आज राष्ट्रीय बहुराज्यीय मंच बन चुका है, जो नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत, शिक्षाविदों, नागरिक समाज संगठनों और समुदायों को एक साथ लाकर ग्रामीण भारत के लिए नई कार्ययोजनाओं पर चर्चा करता है।
इस वर्ष आठ दिनों तक चलने वाली संगोष्ठी असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और नई दिल्ली में आयोजित होगी। इसमें आजीविका, सुशासन, जलवायु अनुकूलन, लैंगिक समानता, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और स्थानीय आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी, जिनके आधार पर ग्रामीण भारत के लिए व्यावहारिक कार्य योजनाएँ तैयार की जाएँगी।











