बस्तर में शहीद जवानों की डिजिटल पहचान, तस्वीरों के साथ लगाए जा रहे QR कोड

जगदलपुर में नक्सल हिंसा के दौरान शहीद हुए जवानों की यादों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की पहल शुरू की गई है। बस्तर के दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जैसे इलाकों में शहीद जवानों की तस्वीरों के साथ QR कोड लगाए जा रहे हैं। इन्हें स्कैन करते ही मोबाइल पर संबंधित जवान का नाम, तस्वीर और शहादत से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
इस पहल का उद्देश्य शहीदों की वीरगाथा को केवल आंकड़ों तक सीमित रखने के बजाय उनकी व्यक्तिगत कहानी को आम लोगों और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। शहीद स्मारकों पर पहुंचने वाले लोग मोबाइल से QR कोड स्कैन कर जवान के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे।
1280 जवानों की शहादत को डिजिटल रूप में सहेजने की कोशिश
बस्तर संभाग में वर्ष 2000 से 2026 तक करीब 1280 जवानों ने नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान शहादत दी है। दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे हैं। ताड़मेटला, रानी बोदली, मिपना और बुरकापाल जैसे इलाकों में हुए बड़े हमलों में भी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल के जवान शहीद हुए थे।
अब इन शहादतों को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने की तैयारी है। शहीद स्मारकों पर जवानों की तस्वीर और QR कोड लगाए जाएंगे। किसी व्यक्ति के QR कोड स्कैन करने पर संबंधित जवान की ड्यूटी, शहादत की घटना और बस्तर की शांति के लिए उनके योगदान से जुड़ी जानकारी सामने आएगी।
इससे शहीदों के परिवारों की कहानियां और उनके बलिदान को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। आने वाली पीढ़ियां भी इन डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए बस्तर के संघर्ष और जवानों के योगदान के बारे में जान सकेंगी।
शहादत वाली जगहों की मिट्टी भी की जा रही संग्रहित
डिजिटल पहल के साथ शहीद स्थलों को भी तिरंगा यात्रा से जोड़ा जा रहा है। इन स्थानों पर पहुंचकर जवानों को श्रद्धांजलि दी जा रही है और वहां की मिट्टी भी संग्रहित की जा रही है। इसका उद्देश्य उन जगहों की स्मृति को संजोकर रखना है, जहां सुरक्षा बलों के जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान गंवाई।
बस्तर के उन इलाकों से भी तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है, जो कभी नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्र माने जाते थे। यात्रा के दौरान शहीद स्थलों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस पहल के जरिए युवाओं को शहीद जवानों के संघर्ष और बलिदान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।











