कोटा की मुकुंदरा टनल में भरा पानी, 50 घंटे तक चला ऑपरेशन… अब दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक बहाल

कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे बनी मुकुंदरा टनल में भारी पानी भरने के बाद करीब 50 घंटे की मशक्कत के बाद यातायात पूरी तरह बहाल कर दिया गया है. पानी बढ़ने के कारण टनल को बंद करना पड़ा था. इसके बाद वाहनों को दरा घाटी की ओर डायवर्ट किया गया था. अब दोनों ट्यूब से पानी निकालने के बाद वाहनों की आवाजाही सामान्य हो गई है. NHAI ने टनल से पानी निकालने के लिए अतिरिक्त पंप और जनरेटर लगाए थे. लगातार कई घंटे तक चले अभियान के बाद बुधवार देर रात करीब 12 बजे दोनों ट्यूब से पानी काफी हद तक निकाल लिया गया.

अचानक बढ़ गया था पानी का स्तर

मुकुंदरा टनल में पिछले दो दिनों से पानी लगातार बढ़ रहा था. इसके चलते बुधवार को सुरक्षा के लिहाज से टनल में यातायात रोक दिया गया. इस दौरान मुंबई की तरफ से आने वाले वाहनों को ट्यूब-1 से निकाला जा रहा था, जबकि दूसरे हिस्से का यातायात दरा घाटी की ओर डायवर्ट किया गया. कोटा ग्रामीण पुलिस के मोडक थाना प्रभारी राजेंद्र प्रसाद मीणा के मुताबिक, ट्रैफिक डायवर्जन के कारण दरा घाटी में दोनों तरफ से वाहनों का दबाव बढ़ गया था. इससे वाहनों की कतार लग गई. यातायात की रफ्तार धीमी हो गई. व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया.

टनल के ड्रेनेज सिस्टम पर उठे सवाल

मुकुंदरा टनल में पानी भरने की घटना के बाद इसके ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने बताया कि टनल में सीपेज की समस्या को निर्माण के दौरान वर्ष 2023 में ही पहचान लिया गया था. सीपेज के पानी को बाहर निकालने के लिए टनल के नीचे अंडरग्राउंड टैंक बनाए गए हैं. पानी इन टैंकों में जमा होता है और फिर पंप के जरिए बाहर निकाला जाता है. हालांकि, अचानक पानी की आवक बढ़ने के कारण मौजूदा पंपिंग क्षमता कम पड़ गई और टनल में पानी भर गया.

NHAI ने कहा- टनल को कोई खतरा नहीं

NHAI के अधिकारियों का कहना है कि टनल में आया पानी सीपेज के कारण था और इससे टनल के स्ट्रक्चर को कोई नुकसान नहीं हुआ है. अधिकारियों के मुताबिक, टनल की संरचना को किसी तरह का खतरा नहीं है. NHAI का कहना है कि टनल एक्सपर्ट्स की सलाह के आधार पर इसका निर्माण किया गया है. पानी की निकासी के लिए पहले से ड्रेनेज और पंपिंग सिस्टम बनाया गया था, लेकिन अचानक बढ़ी पानी की आवक के कारण अतिरिक्त पंपों की जरूरत पड़ी.

2.5 करोड़ लीटर क्षमता के टैंक

प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल के मुताबिक, टनल में पानी जमा करने के लिए करीब 2.5 करोड़ लीटर क्षमता के टैंक बनाए गए हैं. इनमें अलग-अलग टैंकों में सीपेज का पानी जमा होता है और पंपिंग सिस्टम के जरिए इसे बाहर निकाला जाता है. टनल में अलग-अलग क्षमता के पंप लगाए गए हैं. इनमें 6 हॉर्स पावर और 25 हॉर्स पावर तक के पंप शामिल हैं. अधिकारियों के अनुसार ये पंप बड़ी मात्रा में पानी बाहर निकालने में सक्षम हैं.

420 हॉर्स पावर तक बढ़ेगी पंपिंग क्षमता

NHAI ने टनल में पानी की निकासी की क्षमता बढ़ाने का फैसला पहले ही कर लिया था. जून में अतिरिक्त पंप लगाने का निर्णय लिया गया था और नए पंपों का ऑर्डर भी दिया जा चुका है. अधिकारियों के अनुसार, पंपिंग क्षमता को बढ़ाकर करीब 420 हॉर्स पावर तक किया जाएगा. इसके लिए 35 और 25 हॉर्स पावर के छह-छह पंप व 10 हॉर्स पावर के चार पंप लगाए जाएंगे. NHAI और प्रशासन की टीमों की लगातार मेहनत के बाद टनल से पानी निकालकर यातायात फिर से शुरू कर दिया गया है. अतिरिक्त पंपों की मदद से पानी निकालने का काम भी जारी रखा गया, ताकि टनल में दोबारा जलभराव की स्थिति न बने.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close
Virus-free.www.avast.com