44 साल में दूसरी बार श्रीलंका ने किया ये कारनामा, सुथार-जडेजा भी रहे बेअसर; जडेजा की बात कितनी सही?

गॉल में खेले जा रहे टेस्ट मैच के तीसरे दिन सोमवार को जहां पहला सीजन भारत के नाम रहा था, तो लंच और चाय के बीच में श्रीलंका ने जोरदार वापसी की. इस दौरान पहला टेस्ट खेल रहे सोनल दिनुशा (नाबाद 62) और तीन साल बाद टीम में वापसी करने वाले निरोशन डिकवेला (नााद 71) ने कमाल की बल्लेबाजी करते हुए दूसरे सीजन में भारतीय बॉलरों को एक भी विकेट नहीं तो लेने ही दिया, तो वहीं दोनों ने इस दौरान 29 ओवरों में चार रन प्रति ओवर की दर से 119 रन जोड़े. और इसके साथ ही श्रीलंका ने भारत के खिलाफ 44 साल के इतिहास में वो कारनामा कर डाला, जो अभी तक सिर्फ एक ही बार हुआ था. और अगर भारत विकेट नहीं चटका सका, तो इसकी वजह पूर्व क्रिकेट जडेजा ने बताई.

भारत के खिलाफ 44 साल, दूसरी बार कारनामा

पहला टेस्ट खेल रहे सोनल दिनुषा और डिकवेला ने जिस कॉन्फिडेंस के साथ बल्लेबाजी की, उससे उन्होंने पहले सीजन में बन दबाव को खत्म कर दिया. और दोनों ने मिलकर 44 साल के इतिहास में दूसरी बार बड़ा कारनामा कर दिया. दरअसल भारत के खिलाफ अपने पहले पांच विकेट 100 से कम रन पर गंवाने के बाद यह दूसरा मौका है ,जब श्रीलंका के लिए छठे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी हुई है. पहली शतकीय साझेदारी भी इसी मैदान पर 2015 में दिनेश चांदीमल और लाहिरू थिरिमने के बीच 125 रनों की हुई थी. तब श्रीलंका ने पहली पारी में 192 रनों से पिछड़ने के बाद वह टेस्ट 63 रनों से जीता था, जो इस फॉर्मेट में भारत के खिलाफ उनकी आखिरी जीत थी.

जडेजा ने बताई वजह, बात कितनी सही?

दरअसल करियर का पहला टेस्ट खेल रहे छोटे कद के सोनल दिनुशा ने चायकाल तक अपने 62 में से आधे से भी ज्यादा रन सिर्फ और सिर्फ स्वीप शॉट से बनाए. उनके बल्ले से कुछ बेहतरीन शॉट देखने को मिले. और पहले सेशन में नई गेंद से खतरनाक घुमाव हासिल करने वाले मानव सुथार सहित भारतीय स्पिन तिकड़ी इसकी कोई काट नहीं निकाल सकी.

इस पर कमेंट्री के दौरान अजय जडेजा ने कहा, ‘दिनुशा की स्नीप शॉट पर गजब की पकड़ है, लेकिन तमाम बातों से अलग यह बात भी अहम है कि नियमों के हिसाब से आप लेग साइड में विकेटकीपर के पीछे दो से ज्यादा खिलाड़ी नहीं चुन सकते. और दिनुशा ने रन निकालने के लिए यही रास्ता चुना.’

“नियम के अनुसार लेग साइड (ऑन साइड) पर विकेटकीपर के पीछे यानी बैकवर्ड स्क्वायर लेग और विकेटों की लाइन के बीच के हिस्से में दो से अधिक फील्डर तैनात नहीं किए जा सकते.”

अगर ऐसा है भी, तो भी यह यही बताता है कि भारतीय बॉलरों के पास रणनीति ही नहीं थी. अगर विकेटकीपर के पीछे दो से ज्यादा फील्डर तैनात नहीं कर सकते, तो रन रोकने और विकेट चटकाने की कोई तो रणनीति होगी ही. बहरहाल, इसमें तीनों ही भारतीय स्पिनर नाकाम रहे

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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