नाग पंचमी पर डॉक्टर की अनोखी इंसानियत: मृतप्राय अहिराज की टूटी रीढ़ जोड़ी, स्टील वायर से किया सफल ऑपरेशन

मुंगेली, 17 अगस्त 2026। नाग पंचमी के मौके पर वन्यजीवों के प्रति संवेदना की मिसाल पेश करने वाली छह साल पुरानी एक अनोखी घटना सामने आई है। वर्ष 2020 में गंभीर रूप से घायल एक अहिराज (बैंडेड करैत) की पशु चिकित्सक ने सफल सर्जरी कर जान बचाई थी। सांप की रीढ़ की हड्डी टूट गई थी और शरीर का पिछला हिस्सा पूरी तरह काम नहीं कर रहा था।
यह ऑपरेशन डॉ. आर.एम. त्रिपाठी ने किया था, जो वर्तमान में पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग, मुंगेली में उप संचालक के पद पर पदस्थ हैं। घटना 18 जून 2020 की है, जब बिलासपुर के सर्पमित्र बब्बू सोनी घायल अहिराज को लेकर पशु चिकित्सा विभाग पहुंचे थे।
टूटी रीढ़ देखकर भी नहीं मानी हार
जांच में पता चला कि सांप की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी थी। उसके शरीर का अगला हिस्सा और सिर चल रहे थे, लेकिन पिछला हिस्सा निष्क्रिय था। हालत बेहद गंभीर थी और उसके बचने की संभावना काफी कम मानी जा रही थी।
जांच के दौरान जब टूटी हुई रीढ़ की हड्डी को सही स्थिति में लाया गया, तो सांप के पिछले हिस्से में हलचल दिखाई दी। इससे डॉक्टर को उम्मीद जगी कि ऑपरेशन के जरिए उसकी जान बचाई जा सकती है।
करीब एक घंटे चली जटिल सर्जरी
इसके बाद घायल अहिराज को डॉ. एस.पी. सिन्हा के क्लीनिक ले जाया गया। सबसे पहले घाव की सफाई की गई और 2 प्रतिशत जाइलोकैन से लोकल एनेस्थीसिया दिया गया। टूटी हुई वर्टिब्रा को उसकी जगह पर रिपोजिशन किया गया।
रीढ़ की दोनों हड्डियों में ड्रिलर की मदद से छेद किए गए और उन्हें स्टेनलेस स्टील वायर से बांधकर स्थिर किया गया। इसके बाद मांसपेशियों और त्वचा को निर्जंतुक धागे से सिला गया और मलहम-पट्टी की गई।
करीब एक घंटे तक चले ऑपरेशन में 12 टांके लगाए गए। सर्जरी के बाद सांप में जीवन के संकेत दिखाई देने लगे, जिससे डॉक्टर और पूरी टीम को बड़ी राहत मिली।
तीन दिन बाद जंगल में छोड़ा गया
ऑपरेशन के बाद अहिराज की लगातार देखभाल की गई। करीब तीन दिन बाद सर्पमित्र बब्बू सोनी ने उसे उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया। चूंकि सांप वन्यजीव है, इसलिए उपचार के बाद उसे वापस प्राकृतिक वातावरण में छोड़ना ही इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य था।
उस समय अहिराज की उम्र करीब चार वर्ष और लंबाई लगभग साढ़े चार फीट थी। डॉ. त्रिपाठी के लिए यह सर्प की सर्जरी का दूसरा अनुभव था। इससे पहले वे एक कोबरा का भी उपचार कर चुके थे।
सांप इंसान का दुश्मन नहीं, किसानों का मित्र
डॉ. आर.एम. त्रिपाठी के मुताबिक, सांप सामान्य परिस्थितियों में इंसानों पर हमला नहीं करते। छेड़े जाने या अनजाने में उन पर पैर पड़ने जैसी स्थिति में वे अपनी सुरक्षा के लिए काट सकते हैं।
सांप किसानों के लिए भी बेहद उपयोगी हैं, क्योंकि वे खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों को खाते हैं और उनकी संख्या नियंत्रित करने में प्राकृतिक मदद करते हैं। इसलिए सांप दिखाई देने पर उसे मारने के बजाय प्रशिक्षित सर्पमित्र की सहायता से सुरक्षित रेस्क्यू कराकर जंगल में छोड़ना चाहिए।
नाग पंचमी पर मिला संवेदना का संदेश
छह साल पुरानी यह घटना आज नाग पंचमी पर इसलिए खास बन गई है, क्योंकि यह बताती है कि हर जीव की जिंदगी की अपनी अहमियत है। जिस अहिराज को देखकर डर पैदा हो सकता था, उसमें डॉक्टर ने बचाई जा सकने वाली एक जिंदगी देखी।
करीब एक घंटे की सर्जरी, 12 टांके और स्टेनलेस स्टील वायर की मदद से रीढ़ को स्थिर करने का प्रयास सफल रहा। तीन दिन बाद वही सांप फिर अपने प्राकृतिक संसार में लौट गया।
डॉ. त्रिपाठी की यह पहल वन्यजीव संरक्षण और मानवीय संवेदना की मिसाल है। नाग पंचमी पर इसका संदेश साफ है—सांप को देखते ही डर या हिंसा नहीं, बल्कि सावधानी, समझदारी और संरक्षण का रास्ता अपनाएं।











