सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की होगी सीधी निगरानी, अफसर और विशेषज्ञ कक्षा में बैठकर जांचेंगे शिक्षण स्तर

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने जमीनी स्तर पर निगरानी की व्यवस्था शुरू करने की तैयारी की है। इसके तहत राज्य स्तरीय टीम के अफसर और विषय विशेषज्ञ खुद स्कूलों का दौरा करेंगे और कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई की गुणवत्ता का आकलन करेंगे।

पहले चरण में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, महासमुंद और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिलों का चयन किया गया है। टीम प्रत्येक जिले के कम से कम तीन स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगी। इसमें हाई परफॉर्मिंग, औसत और औसत से कम प्रदर्शन करने वाले स्कूल शामिल होंगे।

कक्षा में पढ़ाई के तरीके पर विशेष नजर

निरीक्षण के दौरान देखा जाएगा कि शिक्षक विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं या नहीं और पढ़ाई के दौरान प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियों का इस्तेमाल किया जा रहा है या नहीं। कमजोर विद्यार्थियों पर अलग से ध्यान देने, टीचिंग-लर्निंग मटेरियल के उपयोग और खेल व गतिविधि आधारित शिक्षण की भी जांच की जाएगी।

तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों की दक्षता का होगा आकलन

विशेषज्ञ कक्षा 3, 6 और 9 के विद्यार्थियों की भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों में दक्षता का विश्लेषण करेंगे। मूल्यांकन के आधार पर विद्यार्थियों की कमजोर और बेहतर दक्षताओं को कलर कोड के जरिए दर्ज किया जाएगा। कमजोर प्रदर्शन वाली दक्षताओं को रेड और बेहतर प्रदर्शन वाली दक्षताओं को ग्रीन कोड दिया जाएगा।

रिपोर्ट के आधार पर बनेगी सुधार की कार्ययोजना

राज्य स्तरीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी, बीईओ, बीआरसी, सीएसी और डाइट के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें स्कूलों की कमजोरियों को दूर करने के लिए समयबद्ध सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

तैयार की गई कार्ययोजना को जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से समग्र शिक्षा विभाग और राज्य स्तरीय सुधारात्मक समिति को भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई की वास्तविक स्थिति की पहचान कर कमजोर क्षेत्रों में तत्काल सुधार करना है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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