जजों की रिटायरमेंट एज बढ़ाने के विरोध में क्यों उतरे यूपी समेत ये 10 राज्य?

जिला अदालतों में काम करने वाले जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में अहम मोड़ पर पहुंच गया है. हालांकि, कई सारे राज्य सुप्रीम कोर्ट इस फैसले के पक्ष में हैं, तो कुछ खिलाफ हैं. बाकी कुछ राज्य अभी भी इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं. जिला जजों के मामले में सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि उनके रिटायरमेंट की उम्र 1,2 साल आगे बढ़ा दी जाए, क्योंकि कोर्ट का मानना है कि बाकी सरकारी कर्मचारियों की तुलना में जिला जज अपने पद पर देरी से कार्यरत होते हैं, इसलिए वो इस फैसले के पक्ष में है. हालांकि, इस मामले में अभी फैसला कंफर्म नहीं किया गया है.

इस पूरे मामले की एक और बड़ी वजह है देश की अदालतों में जजों की कमी. वरिष्ठ अधवक्ता सिद्धार्थ भटनागर ने राज्यसभा में दिए गए सवाल के जवाब को लेकर दावा किया था कि जिला जजों के पद भारी मात्रा में खाली होने की वजह से रिटायरमेंट के बाद कई जजों को वापस लाने की समस्या उत्पन्न हुई थी. इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर और बाकी पहलुओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर पॉजिटिव पक्ष में है. अभी अलग-अलग जगहों पर स्थिति अलग है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस उम्र को बढ़ाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है.

नहीं बन पा रही है सहमति

1 सितंबर 2026 की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि ज्यादातर हाई कोर्ट रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के पक्ष में हैं, जबकि कई राज्य अभी सहमत नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि वह राज्यों के विरोध से पूरी तरह सहमत नहीं है और उनसे दोबारा सकारात्मक तरीके से विचार करने को कहा है. एक तरफ अदालतों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं और दूसरी तरफ रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने को लेकर राज्यों और सुप्रीम कोर्ट के बीच सहमति नहीं बन पा रही है. राज्यों की अपनी चिंता है.

  • कौन से राज्य विरोध कर रहे हैं- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, केरल, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा ने जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का विरोध किया है.
  • कौन से राज्य अभी विचार कर रहे हैं- असम, बिहार, गोवा, गुजरात, त्रिपुरा, दिल्ली, आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है.
  • कौन से राज्य तैयार हैं- तेलंगाना, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, सिक्किम और पुडुचेरी रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के पक्ष में हैं.
  • कितने पद खाली हैं- दिसंबर 2025 के राज्यसभा जवाब के हवाले से सुनवाई में बताया गया कि देशभर में जिला जजों के 1,744 पद खाली थे.
  • सुप्रीम कोर्ट उम्र क्यों बढ़ाना चाहता है- कोर्ट का कहना है कि न्यायिक सेवा में लोग सामान्य सरकारी नौकरी की तुलना में देर से आते हैं. इसलिए रिटायरमेंट उम्र में दो साल की बढ़ोतरी उचित है.

देश में जिला जजों के 1,744 पद खाली

इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील और मामले में कोर्ट की मदद कर रहे सिद्धार्थ भटनागर ने राज्यसभा में दिए गए एक जवाब का हवाला देते हुए बताया कि दिसंबर 2025 तक देशभर में जिला जजों के 1,744 पद खाली थे. ऐसे में कई रिटायर्ड जजों को कार्यभार संभालने के लिए वापस लाया जाता है. कोर्ट की तरफ से अब इस मामले को 2 हफ्ते के बाद के लिए आगे बढ़ा दिया गया है, साथ ही ये उम्मीद भी जताई गई है कि जो राज्य इस मुद्दे के पक्ष में नहीं हैं, वो इसे लेकर सकारात्मक विचार बना लें. कोर्ट का मानना है कि जिला जजों को 60 साल की उम्र में रिटायर करने के बजाय कम से कम 61 या 62 साल तक काम करने का मौका दिया जाए.

राज्य आखिर विरोध क्यों कर रहे हैं?

  • जिला जजों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने को कई राज्य विरोध कर रहे हैं, इस विरोध की सबसे बड़ी वजह नई भर्तियों को लेकर चिंता है. दरअसल, राज्य का मानना है कि अगर जज 61 या 62 साल की उम्र में रिटायर होंगे, तो उस पद पर भर्ती करने वाला युवा 2 साल देरी से नियुक्त होगा. यानी राज्यों का तर्क है कि एक तरफ पुराने जजों की सेवा बढ़ेगी, तो दूसरी तरफ नए लोगों के लिए पद खाली होने में समय लगेगा. रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने को लेकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, केरल, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा राज्यों ने विरोध जताया है.
  • देरी से होने वाली नियुक्ति के अलावा राज्यों के तरफ से आर्थिक बोझ की दलील भी दी गई थी. जिसमें कहा गया कि उम्र बढ़ाने से सरकार पर पेंशन और दूसरे खर्चों का बोझ बढ़ेगा, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को ज्यादा मजबूत नहीं माना. कोर्ट ने कहा कि अगर जज 2 साल और नौकरी करेगा तो उसे पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट तुरंत नहीं देने पड़ेंगे. यानी सरकार को इनका भुगतान बाद में करना होगा. इसलिए कोर्ट के मुताबिक इसे सिर्फ सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताना सही नहीं है.

मामले में सुप्रीम कोर्ट का तर्क क्या है?

सुप्रीम कोर्ट इस तुलना को ही सही नहीं मानता कि सरकारी कर्मचारी और न्यायिक अधिकारी एक जैसे हैं. कोर्ट के मुताबिक, सामान्य सरकारी कर्मचारी लगभग 18 साल की उम्र से नौकरी शुरू कर सकता है और करीब 60 साल तक काम कर सकता है. इसके उलट न्यायिक सेवा में आने वाला व्यक्ति काफी बाद में आता है. कोर्ट ने कहा कि सामान्य तौर पर न्यायिक सेवा में प्रवेश करीब 27-28 साल की उम्र में होता है, जबकि सीधे अतिरिक्त जिला न्यायाधीश यानी ADJ बनने वाले उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 35 साल होती है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close