कुलपति के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए हाई पावर कमेटी विश्वविद्यालय पहुंची, नस्तियां और अभिलेख खंगाले

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. संजय तिवारी के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच के लिए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति मंगलवार को विश्वविद्यालय पहुंची। समिति ने नस्तियों, नोटशीट और अन्य अभिलेखों की जांच की। कुलपति से मांगे गए दस्तावेज तय समय सीमा में उपलब्ध नहीं कराए जाने के बाद समिति ने विश्वविद्यालय पहुंचकर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जांच शुरू की है।
राज्यपाल के निर्देश पर गठित हुई समिति
कुलपति के खिलाफ विधायक एवं छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ललित चंद्राकर ने कुलाधिपति के समक्ष शिकायत की थी। इसके बाद राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका के निर्देश पर चार सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार गोयल कर रहे हैं। राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना और उप सचिव निधि साहू सदस्य हैं, जबकि अवर सचिव अनुभव शर्मा को संयोजक बनाया गया है। समिति को 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपनी है।
तय समय में दस्तावेज नहीं मिलने पर जांच शुरू
राज्यपाल सचिवालय ने पहले शिकायतों से संबंधित दस्तावेज 24 अगस्त तक उपलब्ध कराने को कहा था। कुलपति की ओर से समय बढ़ाने का अनुरोध किए जाने के बाद अंतिम समय सीमा 31 अगस्त तय की गई। इसके बाद भी संबंधित नस्तियां, नोटशीट और अभिलेख उपलब्ध नहीं होने पर समिति स्वयं विश्वविद्यालय पहुंची। राज्यपाल सचिवालय की ओर से पहले ही स्पष्ट किया गया था कि समय पर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
नए पाठ्यक्रम और नियुक्तियों को लेकर भी शिकायत
कुलपति पर एमबीए, एमसीए और पीजीडीबीएम समेत आठ नए पाठ्यक्रमों के निरीक्षण के लिए एआईसीटीई और आरसीआई की प्रक्रिया शासन की पूर्व अनुमति के बिना कराने तथा एक संस्था को अलग स्वरूप में प्रस्तुत करने के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा पांच विषयों के विभाग शुरू होने और विद्यार्थियों के प्रवेश से पहले 15 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं।
बड़े वित्तीय और प्रशासनिक मामलों को कार्यपरिषद के समक्ष नहीं रखने तथा बिना विधिवत निविदा करीब 40 लाख रुपए की 380 पुस्तकें खरीदने के आरोप भी शिकायत में शामिल हैं।
उत्तरपुस्तिका खरीद मामले में विश्वविद्यालय को राहत
वहीं, उत्तरपुस्तिका खरीद से जुड़े मामले में जांच समिति के अभिमत से कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन को राहत मिली है। समिति के अनुसार उत्तरपुस्तिकाओं के मुद्रण की प्रक्रिया शासन के निर्देशों के तहत पूरी की गई थी। 50 हजार पूरक उत्तरपुस्तिकाओं की गुणवत्ता जांच में कमी पाए जाने के बाद विश्वविद्यालय ने संबंधित भुगतान रोक दिया था और स्पष्टीकरण मांगा था।
समिति के मुताबिक सत्र 2025-26 के लिए मुद्रित उत्तरपुस्तिकाओं का भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में कम गुणवत्ता वाली उत्तरपुस्तिकाएं अधिक कीमत पर खरीदने से जुड़ी आर्थिक अनियमितता की शिकायत को निराधार पाया गया है।











