2024 में मिली मंजूरी, 2026 में भी शुरू नहीं हुआ काम: महादेव घाट ओवरब्रिज री-टेंडर के भरोसे

रायपुर। रायपुर और अमलेश्वर के बीच बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए प्रस्तावित महादेव घाट ओवरब्रिज परियोजना ठेका एजेंसी के अनुबंध नहीं करने के कारण करीब नौ माह पीछे खिसक गई है। वर्ष 2024 में स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने नवंबर 2025 में 18.66 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था।

तकनीकी और वित्तीय परीक्षण के बाद दिसंबर 2025 में विश्रामपुर की एग्रो स्टील वर्क कंपनी को लगभग 5 प्रतिशत दर पर कार्य आवंटित कर वर्क ऑर्डर जारी किया गया। हालांकि, वर्क ऑर्डर मिलने के बावजूद कंपनी ने विभाग के साथ अनुबंध प्रक्रिया पूरी नहीं की। पीडब्ल्यूडी ने लगभग चार माह तक इंतजार किया, लेकिन कंपनी की ओर से कोई पहल नहीं होने पर सुरक्षा जमा राशि जब्त कर अप्रैल 2026 में पुनः टेंडर जारी कर दिया।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार नए टेंडर में चार कंपनियों ने भाग लिया है। तकनीकी मूल्यांकन पूरा हो चुका है और वित्तीय प्रक्रिया जारी है। अगले 10 दिनों के भीतर नई एजेंसी का चयन कर अनुबंध और कार्य आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

परियोजना की प्रमुख बातें

  • लागत: 18.66 करोड़ रुपए
  • लंबाई: 180 मीटर
  • चौड़ाई: 17 मीटर
  • फोरलेन स्टील ओवरब्रिज
  • निर्माण अवधि: 18 माह
  • री-टेंडर की अंतिम तिथि: 20 जून 2026

मानसून बना नई चुनौती

पीडब्ल्यूडी की योजना गर्मी के मौसम में खारुन नदी का जलस्तर कम होने का लाभ उठाकर नींव और संरचनात्मक कार्य शुरू करने की थी। लेकिन ठेकेदार के पीछे हटने से काम समय पर शुरू नहीं हो सका। अब मानसून के दौरान नदी क्षेत्र में निर्माण कार्य प्रभावित होने की आशंका है, जिससे परियोजना की प्रारंभिक गति धीमी पड़ सकती है।

छह माह टेंडर प्रक्रिया में ही निकल गए

सूत्रों के मुताबिक बड़ी निर्माण परियोजनाओं में तकनीकी योग्यता, वित्तीय क्षमता और अनुभव संबंधी दस्तावेजों की जांच में लंबा समय लगता है। पहली बार एजेंसी चयन और वर्क ऑर्डर जारी होने तक ही कई माह लग गए। इसके बाद एजेंसी द्वारा अनुबंध नहीं करने से पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ी, जिससे परियोजना लगभग नौ माह पीछे चली गई।

हजारों यात्रियों को मिलेगी राहत

महादेव घाट के पुराने पुल के समीप खारुन नदी पर बनने वाला यह फोरलेन ओवरब्रिज रायपुर, अमलेश्वर, पाटन, दुर्ग-भिलाई और नवा रायपुर के बीच आवागमन को सुगम बनाएगा। पीडब्ल्यूडी के ट्रैफिक सर्वे के अनुसार शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक इस मार्ग पर सर्वाधिक दबाव रहता है और रोजाना हजारों वाहन जाम का सामना करते हैं।

30 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन

अधिकारियों के अनुसार अमलेश्वर, पाटन रोड और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से आबादी बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए आगामी 30 वर्षों की यातायात आवश्यकताओं के अनुरूप फोरलेन ओवरब्रिज की डिजाइन तैयार की गई है।

इन क्षेत्रों को होगा सीधा लाभ

महादेव घाट, चंगोराभाठा, डीडी नगर, संतोषी नगर, प्रोफेसर कॉलोनी, अमलेश्वर, अंजोरा, पाटन रोड क्षेत्र तथा दुर्ग-भिलाई से रायपुर आने-जाने वाले हजारों लोगों को इस परियोजना का लाभ मिलेगा।

डिजाइन को लेकर अलग-अलग दावे

ठेका एजेंसी के प्रतिनिधि अजय अग्रवाल का कहना है कि टेंडर में ड्राइंग और डिजाइन से जुड़ी तकनीकी विसंगतियां थीं, जिसके कारण कंपनी ने अनुबंध नहीं किया। वहीं पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता एसके कोरी ने कहा कि डिजाइन में कोई तकनीकी खामी नहीं थी, हालांकि निर्माण को अधिक व्यावहारिक और सरल बनाने के लिए कुछ संशोधन किए गए हैं। पहले प्रस्तावित आर्च स्लैब की जगह अब टी-बीम डिजाइन अपनाने की तैयारी की गई है।

अब सभी की नजरें नई एजेंसी के चयन पर टिकी हैं, ताकि लंबे समय से प्रतीक्षित महादेव घाट ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हो सके और लोगों को जाम की समस्या से राहत मिल सके।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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