धर्म-परिवर्तन केस के 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज:4 साल में 200 लोगों का धर्म बदलवाया, हाईकोर्ट ने कहा- यह एक संगठित सिंडिकेट

उदयपुर के ऋषभदेव में हुए कथित जबरन धर्म परिवर्तन केस के 14 आरोपियों को जोधपुर हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार 14 आरोपियों की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। जस्टिस सुनील बेनीवाल ने मामले की गंभीरता और सबूतों को देखते हुए कहा कि आरोपी एक संगठित सिंडिकेट की तरह काम कर रहे थे।
ये है पूरा मामला
यह पूरा मामला जून 2026 का है, जब उदयपुर के ऋषभदेव इलाके में 5, 6 और 7 जून को एक धार्मिक शिविर (कैम्प) आयोजित किया गया था। पुलिस और शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस कैम्प की आड़ में स्थानीय लोगों को डरा-धमकाकर और लालच देकर जबरन ईसाई धर्म में परिवर्तन कराया जा रहा था।
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी अमित कुमार छत्तीसगढ़ से उदयपुर आया था और वह पंजाब के अंकुर नरूला नाम के व्यक्ति के लगातार संपर्क में था। आरोपी हरीश के बारे में पुलिस ने बताया कि वह पिछले चार सालों में करीब 150-200 लोगों का धर्म परिवर्तन करा चुका है। आरोपियों के पास से कई आपत्तिजनक धार्मिक किताबें और सामग्री भी बरामद की गई हैं।
कब और कैसे हुई कार्रवाई?
इस मामले में पुलिस ने 6 जून 2026 को उदयपुर के ऋषभदेव थाने में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसी दिन 6 जून को 12 आरोपियों (हरीश, अमित कुमार, पलाश, आशीष, भेरूलाल, बाबूलाल, शंकरलाल, राकेश, अनिल कलसुआ, नारायण, दिनेश और पलाश) को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और 14 जून को प्रभुलाल और सोहनलाल को भी न्यायिक हिरासत में ले लिया गया। इन सभी पर राजस्थान धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम 2025 की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है।
कोर्ट ने फिलहाल सभी 14 आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जिससे उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा। हालांकि, कोर्ट ने आरोपियों को यह छूट दी है कि पुलिस द्वारा कोर्ट में चार्जशीट (चालान) पेश करने के बाद वे दोबारा जमानत के लिए नई अर्जी लगा सकते हैं।











