बारामती विमान हादसा: प्रारंभिक जांच में एयरपोर्ट की बड़ी लापरवाहियां उजागर, कम दृश्यता भी बनी वजह

महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे को लेकर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में एयरपोर्ट पर सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की गंभीर कमी को उजागर किया गया है। कम दृश्यता, मौसम संबंधी सुविधाओं का अभाव और अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड जैसी खामियों को हादसे के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, जिस समय विमान लैंडिंग की कोशिश कर रहा था, उस समय विजिबिलिटी महज 3000 मीटर थी, जबकि विजुअल फ्लाइट रूल्स (VFR) के तहत न्यूनतम 5000 मीटर दृश्यता आवश्यक होती है। इसके बावजूद विमान ने अप्रोच जारी रखी।

जांच में सामने आया कि बारामती एयरपोर्ट एक अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड है, जहां विंड सॉक्स के अलावा कोई आधुनिक नेविगेशनल एड्स उपलब्ध नहीं हैं। रनवे 11 की दिशा में विंड सॉक्स नहीं था। रनवे की आखिरी री-कारपेटिंग मार्च 2016 में हुई थी और उसके बाद से मरम्मत नहीं की गई, जिसके चलते रनवे मार्किंग्स फीकी पड़ चुकी थीं और सतह पर ढीली बजरी पाई गई।

एयरपोर्ट पर इनहाउस एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग (ARFF) यूनिट भी मौजूद नहीं है। चार्टर या नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट्स के लिए नगर निगम की एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड पर निर्भर रहना पड़ता है। एयरोड्रोम के चारों ओर पर्याप्त बाउंड्री वॉल भी नहीं है।

मौसम संबंधी जानकारी के लिए कोई आधिकारिक MET सुविधा उपलब्ध नहीं थी। टेम्पररी टावर में लगे वेदर इंस्ट्रूमेंट के आधार पर ही हवा और तापमान की जानकारी दी जाती थी। विजिबिलिटी की सूचना फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन द्वारा तैयार किए गए चार्ट के आधार पर दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, विमान को रनवे 11 पर लैंडिंग क्लीयरेंस दिया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, विमान लैंडिंग के दौरान दाईं ओर झुका हुआ दिखाई दिया और रनवे के किनारे से लगभग 50 मीटर दूर पेड़ों से टकराने के बाद जमीन से टकरा गया। टक्कर के बाद विमान में आग लग गई, जिससे कॉकपिट और केबिन पूरी तरह जल गए।

जांच एजेंसी ने संकेत दिया है कि कम दृश्यता और एयरपोर्ट की अधूरी बुनियादी सुविधाएं हादसे में अहम भूमिका निभा सकती हैं। विस्तृत अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही दुर्घटना के सटीक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

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