समय की परिधि से परे: धमतरी के ‘सेमरा’ में आज होगी होलिका दहन, कल उड़ेगा अबीर-गुलाल; जानें क्या है इसके पीछे का रहस्य

धमतरी: दुनिया जिसे ‘वक्त का पाबंद’ कहती है, धमतरी के कुरूद ब्लॉक का अंतिम छोर पर बसा ग्राम सेमरा (सी) उस परिभाषा को अपनी श्रद्धा से बदल देता है. जब शेष भारत 3 मार्च 2026 की फाल्गुन पूर्णिमा की प्रतीक्षा में अपनी तैयारी कर रहा होगा, तब ‘करबीन सेमरा’ के नाम से विख्यात इस अंचल में आज 24 फरवरी 2026 की गोधूलि बेला में ही होलिका की पवित्र अग्नि प्रज्वलित हो उठेगी.
यह केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि समय की धारा के विपरीत बहती एक अनुपम लोक-संस्कृति है. पौने दो सौ की लघु आबादी वाले इस ग्राम में मतभेद और मनभेद की दीवारें ढह जाती हैं, जब ग्रामीण अपने आराध्य ‘सिदार देव’ के चरणों में शीश नवाकर सात दिन पूर्व ही रंगोत्सव का शंखनाद करते हैं.

सरपंच छबिलेश सिन्हा बताते हैं कि यह रीति किसी आधुनिक प्रयोग का हिस्सा नहीं, बल्कि सदियों पुरानी विरासत है. लोक-स्मृतियों के अनुसार, रक्षक देव सिदार ने ही स्वप्न में आकर गांव की रक्षा के बदले हर पर्व को एक सप्ताह पूर्व मनाने का आदेश दिया था. बुजुर्गों की मानें तो जब-जब इस ‘लक्ष्मण रेखा’ को लांघने का साहस किया गया, गांव ने अग्नि और अकाल के दंश झेले. यही कारण है कि आज की शिक्षित पीढ़ी भी विज्ञान से अधिक अपनी जड़ों पर विश्वास करती है.
आज रात्रि सिदार देव के मंदिर के सम्मुख नगाड़ों की थाप गूंजेगी और कल सुबह फाग गीतों की स्वर-लहरियों के बीच पूरा गांव अबीर-गुलाल के मेघों में छिप जाएगा. सेमरा की यह ‘अगेती होली’ सिद्ध करती है कि जहाँ विश्वास अडिग हो, वहाँ उत्सव तिथियों के मोहताज नहीं होते.











