भागीरथपुरा जल कांड: हाई कोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाई, मौतों के आधार पर उठाए सवाल

भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मंगलवार को कड़ी टिप्पणी की और शासन द्वारा प्रस्तुत डेथ ऑडिट रिपोर्ट पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि बिना पोस्टमार्टम के यह कैसे तय किया गया कि 16 मौतें दूषित पानी के कारण हुईं और अन्य मौतों को क्यों अलग रखा गया।
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से बताया गया कि 23 मौतों का ऑडिट हो चुका है, जिनमें से 16 को दूषित पानी से संबंधित माना गया है, तीन की वजह स्पष्ट नहीं और चार अन्य बीमारियों के कारण हुई। कोर्ट ने वर्बल एटाप्सी के आधार पर मौतों के आंकड़े तय करने पर आपत्ति जताई और समिति के निष्कर्षों की वैधता पर सवाल खड़े किए।
कोर्ट ने निगम द्वारा पानी की सैंपलिंग के सीमित प्रयासों पर भी चिंता व्यक्त की। एडवोकेट ने बताया कि निगम केवल आठ बिंदुओं पर जांच कर रहा है, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 34 बिंदुओं पर परीक्षण किया था। कोर्ट ने कहा कि स्थिति बहुत खतरनाक है और शासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिले। आदेश सभी पक्षों को सुनने के बाद सुरक्षित रख लिया गया।











