पीएम मोदी से आशीर्वाद अब गडकरी से भेंट, दिल्ली से जावद तक सियासी पारा गर्म, तय हो रही ‘सखलेचा परिवार’ की तीसरी पीढ़ी की भूमिका!

राजनीति में घटनाक्रम संयोग नहीं, बल्कि कई बार भविष्य के बड़े प्रयोग होते हैं। जावद से लगातार पांच बार के अजेय भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा के दिल्ली दौरों की तस्वीरों ने मालवा से लेकर राजधानी भोपाल तक सियासी हलचल तेज कर दी है। कुछ समय पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सपरिवार आत्मीय मुलाकात के बाद, अब सोमवार को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ हुई भेंट ने एक बड़े राजनीतिक संदेश को जन्म दे दिया है।

इन दोनों ही हाईप्रोफाइल मुलाकातों में जो एक चेहरा सबसे प्रमुखता से उभरा है, वह है सखलेचा के सुपुत्र ऋषभ सखलेचा का।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पहले देश के सबसे बड़े नेता पीएम मोदी से आशीर्वाद और अब नितिन गडकरी से सीधी चर्चा, यह महज शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि ऋषभ सखलेचा की राजनीति में ‘ग्रैंड लॉन्चिंग’ की सुव्यवस्थित पटकथा है, जो जल्दी ही सियासी परदे पर दिखाई देगी।

पीएम मोदी के बाद गडकरी से मुलाकात के मायने

पिछले दिनों जब ओमप्रकाश सखलेचा ने सपरिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की थी, तब पीएम मोदी का ऋषभ सखलेचा से आत्मीय संवाद करते हुए फोटो सामने आया था। उस समय इसे एक पारिवारिक और शिष्टाचार भेंट माना गया। लेकिन अब जब विधायक सखलेचा सिर्फ अपने बेटे ऋषभ को साथ लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिलने पहुंचे तो इसके सियासी मायने पूरी तरह स्पष्ट होने लगे हैं।

तस्वीरों में ऋषभ सखलेचा स्वयं केंद्रीय मंत्री गडकरी को दस्तावेज व बुकलेट भेंट करते और गंभीर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। यह दृश्य साफ संकेत देता है कि पिता ओमप्रकाश सखलेचा अब अपने बेटे को केवल परिचय तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि उन्हें नीतिगत और विकास कार्यों की बैठकों में सीधे तौर पर आगे बढ़ा रहे हैं।

दादा से पिता और अब पोते की बारी,  विरासत का नया अध्याय

अविभाजित मध्यप्रदेश की राजनीति में ‘सखलेचा परिवार’ की जड़ें बेहद गहरी रही हैं, पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सखलेचा प्रदेश की सियासत का वो बड़ा नाम रहा है जो बेदाग है लोग आज भी उनकी शालीनता के कायल हैं।
पहली पीढ़ी: प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरेंद्र कुमार सखलेचा ने जनसंघ से लेकर भाजपा को खड़ा करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और जावद को अपनी कर्मभूमि बनाया।
दूसरी पीढ़ी: पिता की इस विरासत को ओमप्रकाश सखलेचा ने बखूबी संभाला और जावद से लगातार पांच बार विधानसभा चुनाव जीतकर इसे भाजपा का अभेद्य गढ़ बना दिया, भाजपा ने उन्हें अपनी सरकार में मंत्री भी बनाया।
तीसरी पीढ़ी की दस्तक: अब दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष ऋषभ सखलेचा की लगातार उपस्थिति यह बता रही है कि सखलेचा परिवार की तीसरी पीढ़ी भी इस राजनीतिक विरासत की कमान थामने के लिए पूरी तरह तैयार है।

जावद से दिल्ली तक चर्चाओं का बाजार गर्म

दिल्ली से आईं इन तस्वीरों के बाद नीमच जिले की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। युवा कार्यकर्ताओं और सखलेचा समर्थकों में जहां एक नए, पढ़े-लिखे और युवा चेहरे के आगे आने से उत्साह का माहौल है, वहीं स्थानीय सियासी गलियारों में इसे भविष्य में जावद की बागडोर ऋषभ के हाथों में सौंपने के मास्टरप्लान के तौर पर देखा जा रहा है।

कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट 

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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