टूटी मूर्तियां, बिन छत का मंदिर…साल में सिर्फ नाग पंचमी पर होती है पूजा

आज नाग पंचमी का पावन पर्व है. देशभर में नाग देवता के मंदिरों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे हैं. हर जगह नाग पंचमी मनाने की अपनी परंपरा और मान्यता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जिसकी कहानी बाकी नाग मंदिरों से काफी अलग है.औरैया के दिबियापुर थाना क्षेत्र के सेहुद गांव में स्थित धौरा नाग मंदिर अपनी अनोखी बनावट और स्थानीय मान्यताओं के कारण लोगों का ध्यान खींचता है. मंदिर में प्रवेश करते ही सबसे पहले खंडित मूर्तियां दिखाई देती हैं. मंदिर की एक और खास बात यह है कि इसकी छत नहीं है. इसके बावजूद नाग पंचमी के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और खंडित मूर्तियों की पूजा-अर्चना की जाती है.

नाग पंचमी पर ही सजता है मंदिर

धौरा नाग मंदिर में पूरे साल नियमित रूप से वैसी पूजा नहीं होती, जैसी आमतौर पर दूसरे मंदिरों में देखने को मिलती है. स्थानीय लोगों के अनुसार नाग पंचमी के दिन मंदिर में विशेष पूजा होती है और इस मौके पर आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. नाग पंचमी के अवसर पर यहां धार्मिक आयोजन के साथ मेला भी लगता है. ग्रामीण परंपरा के मुताबिक दंगल और कुश्ती जैसे आयोजन भी होते हैं.

मंदिर में आखिर क्यों हैं खंडित मूर्तियां?

हिंदू धर्म में मंदिर का नाम सुनते ही लोगों के मन में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और विधि-विधान से होने वाली पूजा की तस्वीर सामने आती है. लेकिन धौरा नाग मंदिर इस मामले में बिल्कुल अलग दिखाई देता है. मंदिर के अंदर मौजूद कई मूर्तियां खंडित अवस्था में हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने समय में मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया था और इसी दौरान यहां मौजूद प्रतिमाएं भी टूट गईं. ग्रामीण इन खंडित मूर्तियों को मोहम्मद गजनवी के दौर में मंदिरों पर हुए हमलों से जोड़ते हैं और इसे 11वीं सदी के आसपास का प्राचीन मंदिर बताते हैं.

छत बनवाने की कोशिश और मौत से जुड़ी कहानी

मंदिर से जुड़ी सबसे रहस्यमयी मान्यता छत बनवाने की कोशिश करने वाले लोगों से जुड़ी है. स्थानीय लोगों का दावा है कि जिसने भी मंदिर की छत डालने या उसे ठीक कराने का प्रयास किया, उसके परिवार में किसी न किसी तरह की अनहोनी हुई. ग्रामीण इस मान्यता को एक स्थानीय इंजीनियर की घटना से भी जोड़कर बताते हैं. उनके मुताबिक, गांव का एक इंजीनियर लखनऊ में नौकरी करता था और उसने मंदिर की छत को दोबारा बनवाने का प्रयास किया था. स्थानीय लोगों के अनुसार, इसके बाद उसके परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गई.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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