ट्रंप ने दक्षिण कोरिया की सैन्य ड्रिल घटाई, इससे उत्तर कोरिया को क्या फायदा होगा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 से 27 अगस्त तक होने वाली 11 दिन की मिलिट्री ड्रिल में अमेरिकी भागीदारी को काफी कम करने का आदेश दिया है. इस अभ्यास में करीब 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिक शामिल होंगे. ट्रंप ने इसे महंगा और उत्तर कोरिया के लिए अनावश्यक रूप से आक्रामक बताया. हालांकि दक्षिण कोरिया ने कहा है कि अभ्यास तय कार्यक्रम के मुताबिक जारी रहेगा. अमेरिका के अलावा संयुक्त राष्ट्र कमान से जुड़े 18 में से 11 देशों के सैनिक और कर्मचारी भी इसमें शामिल होने वाले थे. यह फैसला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सैन्य अधिकारी खुद चेतावनी दे रहे हैं कि यूक्रेन युद्ध से उत्तर कोरिया की सेना को असली युद्ध का नया अनुभव मिला है.
ट्रंप ने कहा कि ये सैन्य अभ्यास महंगे हैं और उत्तर कोरिया को गलत और शत्रुतापूर्ण संदेश देते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उनके राष्ट्रपति रहने के दौरान उत्तर कोरिया शांत और सम्मानजनक रहा है. ट्रंप ने अपने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ अच्छे रिश्तों का भी हवाला दिया. एक और वजह ट्रंप ने बताई. उनका आरोप है कि दक्षिण कोरिया ने ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की अमेरिकी कोशिश में मदद नहीं की. इसलिए उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को ड्रिल काफी कम करने का आदेश दिया.
आखिर ये सैन्य अभ्यास इतने अहम क्यों हैं?
उल्ची फ्रीडम शील्ड (UFS) का मकसद सिर्फ सैनिकों की परेड या हथियारों की प्रदर्शनी नहीं है. इसमें अमेरिका और दक्षिण कोरिया यह अभ्यास करते हैं कि अगर उत्तर कोरिया हमला करता है तो दोनों सेनाएं मिलकर कैसे जवाब देंगी. इस साल के अभ्यास में ड्रोन हमले, GPS में रुकावट और साइबर हमले जैसी नई परिस्थितियों को भी शामिल किया गया है. यानी इस बार का अभ्यास पुराने युद्ध मॉडल के बजाय आधुनिक युद्ध के बदलते तरीके पर केंद्रित है.
अमेरिकी कमांड के कर्नल रयान डोनाल्ड के मुताबिक, यूक्रेन में लड़ चुके उत्तर कोरियाई सैनिकों ने जो सबक सीखे हैं, उन्हें वापस उत्तर कोरिया लेकर गए हैं. इसलिए इस साल के अभ्यास में इन नई क्षमताओं को ध्यान में रखा गया. यूनाइटेड नेशंस कमांड के डिप्टी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल स्कॉट विंटर ने भी कहा कि उत्तर कोरिया के पास अब आधुनिक युद्ध का अनुभव है और उसके बढ़ते तकनीकी इस्तेमाल को ध्यान में रखना जरूरी है.
उत्तर कोरिया को यूक्रेन युद्ध से क्या मिला?
यही इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा है. उत्तर कोरिया ने रूस को यूक्रेन युद्ध में सैनिक, तोपों का गोला-बारूद और बैलिस्टिक मिसाइलें उपलब्ध कराई हैं. बदले में उसके सैनिकों को आधुनिक युद्ध का वास्तविक अनुभव मिल रहा है. अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई अधिकारियों की चिंता इसी बात को लेकर है.
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने जुलाई में कहा था कि रूस 30 हजार और उत्तर कोरियाई सैनिकों को लेने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया रूस को अतिरिक्त बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर देने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस ने भी 2024 में कहा था कि रूस और उत्तर कोरिया की बढ़ती साझेदारी से रूस को यूक्रेन युद्ध में मदद मिल सकती है और इससे उत्तर कोरिया की सैन्य क्षमता तथा अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगियों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई की क्षमता बढ़ सकती है.
उत्तर कोरिया ने भी ड्रिल से पहले मिसाइल दागी
अभ्यास शुरू होने से कुछ दिन पहले 11 अगस्त 2026 को उत्तर कोरिया ने वॉनसान से एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी. यह करीब 700 किमीटर तक गई. यह इस साल उत्तर कोरिया का 11वां संदिग्ध मिसाइल परीक्षण था. इससे पहले 6 अगस्त को भी वॉनसान से एक मिसाइल लॉन्च की गई थी, जिसके असफल होने की आशंका जताई गई थी.
उत्तर कोरिया ने UFS को आक्रामक युद्ध की तैयारी बताया है और कहा है कि वह इसका जवाब और ज्यादा मजबूत तरीके से देगा. हालांकि अमेरिका और दक्षिण कोरिया इन अभ्यासों को रक्षात्मक बताते हैं.
क्या ट्रंप-किम की पुरानी दोस्ती फिर लौट रही है?
ट्रंप का मौजूदा फैसला 2018 की याद भी दिलाता है. उस समय ट्रंप और किम जोंग-उन की पहली शिखर बैठक के बाद अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने बड़े सैन्य अभ्यासों को रोक दिया था. अमेरिकी रक्षा विभाग ने 2018 में उल्ची फ्रीडम गार्डियन (UFS) को सस्पेंड किया था. तब अमेरिका ने इसे उत्तर कोरिया के साथ बातचीत और परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया कदम बताया था.
ट्रंप ने इस बार भी किम के साथ अपने अच्छे संबंधों को फैसले का आधार बनाया है. उन्होंने शनिवार को किम के साथ अपनी पुरानी तस्वीर भी साझा की थी, जिससे दोनों नेताओं के बीच फिर बातचीत या नई शिखर बैठक की अटकलें तेज हुईं.











