महाकाल रोप-वे का बजट बढ़ा, 199 करोड़ के पुराने ठेके की जगह 258.37 करोड़ का नया टेंडर

उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन से महाकाल लोक तक पहुंचाने के लिए प्रस्तावित रोप-वे प्रोजेक्ट अब नए सिरे से आगे बढ़ेगा। दरअसल पहले यह काम ओडिशा की कंपनी मेसर्स इंफ्रा इंजीनियर्स को दिया गया था लेकिन तय रफ्तार से निर्माण नहीं होने के कारण नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) ने उसका ठेका खत्म करने का फैसला लिया है। फिलहाल टर्मिनेशन की औपचारिक प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद नए टेंडर को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

दरअसल रेलवे स्टेशन से महाकाल लोक तक रोप-वे बनाने की योजना केंद्र सरकार के तहत नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) आगे बढ़ा रहा है। इस प्रोजेक्ट का पहला ठेका ओडिशा की कंपनी मेसर्स इंफ्रा इंजीनियर्स को 199 करोड़ रुपए में दिया गया था। कंपनी ने काम शुरू भी किया था और मौके पर कुछ निर्माण गतिविधियां हुई थीं लेकिन प्रोजेक्ट तय गति से आगे नहीं बढ़ पाया।

पुराना ठेका टर्मिनेट करने का निर्णय लिया

वहीं इसी वजह से NHLML ने पुराना ठेका टर्मिनेट करने का निर्णय लिया है। अभी कंपनी को टर्मिनेशन का पत्र जारी करने समेत जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए टेंडर को खोला जा सकेगा। यानी फिलहाल प्रोजेक्ट का काम नई कंपनी को सौंपने की तैयारी है लेकिन नई कंपनी के चयन और वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद ही निर्माण दोबारा गति पकड़ पाएगा।

258.37 करोड़ का उज्जैन रोप-वे का नया टेंडर

वहीं इस बार रोप-वे प्रोजेक्ट के लिए 258.37 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया है। इसमें BOT यानी बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर मॉडल अपनाया गया है। इस व्यवस्था के तहत जिस कंपनी को ठेका मिलेगा, वह अपने खर्च पर रोप-वे का निर्माण करेगी। निर्माण पूरा होने के बाद कंपनी तय अवधि तक इसका संचालन भी करेगी। कंपनी यात्रियों से मिलने वाले शुल्क के जरिए अपनी लागत और कमाई की भरपाई करेगी। तय अवधि पूरी होने के बाद प्रोजेक्ट सरकार को सौंप दिया जाएगा। इस मॉडल में सरकार को निर्माण के लिए सीधे बजट खर्च नहीं करना होगा।

दरअसल नए टेंडर की राशि पुराने ठेके से ज्यादा है। अधिकारियों के मुताबिक, पुराने 199 करोड़ रुपए के ठेके में 18 प्रतिशत GST जोड़ने पर रकम करीब 235 करोड़ रुपए होती है। इसके अलावा नए Schedule of Rates (SOR) के हिसाब से लागत में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसी आधार पर पुराने और नए टेंडर की वास्तविक लागत में लगभग 20 करोड़ रुपए का अंतर बताया गया है।

दरअसल नए टेंडर में निर्माण पूरा करने के लिए 18 महीने की समय सीमा तय की गई है। इसके हिसाब से प्रोजेक्ट मई 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह समय इसलिए भी अहम है क्योंकि उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ होना है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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