मतदाता सूची फ्रीज मामला : सुप्रीम कोर्ट की सीजीआई पीठ 13 अप्रैल को करेगी सुनवाई

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची फ्रीज करने का मामला पहुंच गया है। निर्वाचन आयोग के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अदालत 13 अप्रैल को सुनवाई करेगी। कोर्ट ने शुक्रवार को नई याचिका के साथ पहले से लंबित याचिकाओं पर भी विचार करने पर सहमति जताई।

चुनाव आयोग ने पहले चरण की सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदाता सूची को अंतिम रूप देते हुए फ्रीज कर दिया था। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। मतदाता सूची फ्रीज होने का मतलब है कि अब इस चुनाव के लिए किसी नए मतदाता का नाम जोड़ा नहीं जा सकेगा और हटाए गए नाम भी शामिल नहीं होंगे।

याचिकाकर्ता की दलील क्या है?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के सामने एक वकील ने तत्काल सुनवाई की मांग की। उनका कहना था कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ कई अपीलें अभी लंबित हैं, इसके बावजूद आयोग ने सूची को फ्रीज कर दिया।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एस. नायडू ने बताया कि सूची फ्रीज करने की अंतिम तारीख 9 अप्रैल थी और इसके बाद नए नामों पर विचार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि वोट देने का अधिकार बना हुआ है और याचिकाकर्ताओं की स्थिति भी अन्य लोगों जैसी ही है जिनकी अपीलें स्वीकार की गई थीं।

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