स्टार्टअप हब बनने की राह पर छत्तीसगढ़, नई स्टार्टअप नीति से चमकेंगे युवा; रोजगार के साथ मिलेगा फंड और पहचान

रायपुर: छत्तीसगढ़ आज एक नए दौर की ओर आगे बढ़ रहा है, जहां विकास का आधार केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और उद्यमिता बन रही है। राज्य के हजारों युवा नए विचारों और तकनीकी कौशल से लैस हैं, लेकिन संसाधनों, निवेश और उचित मार्गदर्शन के अभाव में उनकी संभावनाएं अक्सर सीमित रह जाती हैं। इन्हीं संभावनाओं और युवाओं के सपने साकार करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30’ लागू की है। यह नीति न केवल युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

क्या है ‘छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति?

4 फरवरी 2026 को महानदी मंत्रालय भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30’ को मंजूरी दी गई। नई स्टार्टअप नीति के तहत केवल राज्य शासन से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप इकाइयों को विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन दिए जाएंगे। शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को मजबूत करने के लिए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट वाले स्टार्टअप्स को मिनिमम वायबल प्रोडक्ट विकसित करने 10 लाख रुपये तक का सीड फंड दिया जाएगा। इसके अलावा राज्य में निवेश की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से 100 करोड़ रुपये का छत्तीसगढ़ स्टार्टअप (कैपिटल) फंड बनाया जाएगा, जिसके माध्यम से SEBI-पंजीकृत ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स के जरिए स्टार्टअप्स में निवेश किया जाएगा।

साथ ही स्टार्टअप्स को बैंकिंग सहायता से जोड़ने के लिए ₹50 करोड़ का क्रेडिट रिस्क फंड भी बनाया जाएगा, जिसके तहत स्टार्टअप इकाइयों को बैंकों से एक करोड़ रुपये तक के संपार्श्विक-मुक्त ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को अधिकतम 50 रुपये लाख तक के सावधि ऋण या कार्यशील पूंजी पर पांच वर्षों तक 75 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ दिया जाएगा।

नवाचार से निवेश तक, स्टार्टअप्स को हर स्तर पर मिलेगा सहयोग

स्टार्टअप्स के विकास और उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्टार्टअप-केंद्रित आयोजनों में भागीदारी के लिए यात्रा, पंजीकरण और प्रदर्शनी बूथ शुल्क सहित कुल व्यय का 50 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाएगा। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रचार-प्रसार के लिए किए गए विज्ञापन व्यय की भी प्रतिपूर्ति की जाएगी। जो स्टार्टअप्स सफलतापूर्वक निवेश प्राप्त करेंगे, उन्हें फंडरेजिंग के आधार पर अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन भी मिलेगा। नई नीति के तहत स्टार्टअप्स को सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में विशेष रियायतें, भूमि एवं भवन संबंधी दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क में छूट तथा इन्क्यूबेशन सेंटर या किराए के परिसर से संचालित इकाइयों को तीन वर्षों तक किराया अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा स्थायी पूंजी निवेश, गुणवत्ता प्रमाणन, पेटेंट पंजीकरण, परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने और सरकारी अनुसंधान संस्थानों से तकनीक खरीदने पर भी वित्तीय सहायता एवं अनुदान का प्रावधान किया गया है।

दिव्यांग, अग्निवीर और नक्सल पीड़ितों को रोजगार देने पर मिलेगा अतिरिक्त सहायता

रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए नीति में आकर्षक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। 10 से अधिक स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने वाले स्टार्टअप्स को महिला कर्मचारियों के लिए प्रति माह 6,000 रुपये तथा पुरुष कर्मचारियों के लिए प्रति माह 5,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा दिव्यांगजन, सेवानिवृत्त अग्निवीर और नक्सल प्रभावित या पीड़ित व्यक्तियों को रोजगार देने वाले स्टार्टअप्स को उनके वेतन का 40 प्रतिशत तक अनुदान अधिकतम पांच वर्षों तक दिया जाएगा। राज्य सरकार को उम्मीद है कि ‘छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30’ राज्य में उद्यमिता और निवेश को नई गति देगी। इससे नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को बेहतर अवसर मिलेंगे, रोजगार के नए द्वार खुलेंगे और युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का मंच मिलेगा। यह नीति छत्तीसगढ़ को देश के उभरते हुए स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने की बड़ी पहल

छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी शक्ति उसके ग्रामीण और आदिवासी युवा हैं, जिनमें प्रतिभा, नवाचार और आत्मनिर्भरता की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। राज्य की नई स्टार्टअप नीति इन्हीं युवाओं को उद्यमिता की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नीति के तहत कृषि आधारित उद्योगों, वन उत्पादों पर आधारित उद्यमों, हस्तशिल्प तथा ग्रामीण पर्यटन जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण संभव होगा। सरकार की यह पहल केवल नए उद्यम स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के नए अवसर भी तैयार करेगी। यदि यह नीति अपने निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप सफल होती है, तो आने वाले पाँच वर्षों में प्रदेश में हजारों नए स्टार्टअप्स स्थापित हो सकते हैं और इनके माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति और ऊर्जा मिलेगी।

विजन 2047 को गति देने के लाई गई नई स्टार्टअप नीति

सरकार का कहना है कि ‘अमृतकाल: छत्तीसगढ़ विज़न @2047’ के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए राज्य में नवाचार आधारित उद्योगों और उद्यमों को बढ़ावा देना आवश्यक है। अब तक स्टार्टअप्स को औद्योगिक नीतियों के अंतर्गत विभिन्न प्रोत्साहन और सुविधाएं तो मिल रही थीं, लेकिन अलग स्टार्टअप नीति के अभाव में इन्क्यूबेशन, निवेश आकर्षण और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही थी। इसके अलावा, भारत सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग में भी अलग स्टार्टअप नीति का न होना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ था। नई स्टार्टअप नीति के लागू होने से इन कमियों को दूर करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा राज्य में नवाचार और निवेश के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करने महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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