संसद में सरकार बोली-पहले भी पेपर लीक होते थे, कांग्रेस का जवाब- पहले भी कानून था फिर भी लीक हुए पेपर

लोकसभा में पेपर लीक पर आज यानी मंगलवार को चर्चा की शुरुआत हुई. मोदी सरकार पेपर लीक के खिलाफ पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल लाई है, जिसपर 10 घंटे चर्चा होगी. सरकार की ओर से इसकी शुरुआत केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने की. उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान हुए पेपर लीक को लेकर कांग्रेस को घेरा. डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछली सरकारों ने पेपर लीक पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की. जितेंद्र सिंह के हमले का जवाब कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने दिया. उन्होंने सरकार के बिल को दिखावा करार दिया.

सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा, 2009 में रेलवे परीक्षा का पेपर लीक हुआ. 2012 में दिल्ली एम्स परीक्षा का पेपर लीक हुआ. पेपर लीक एक प्रदेश की समस्या नहीं है. पेपर लीक के खिलाफ विशेष कानून की दरकार है.

जितेंद्र सिंह ने बताया बिल में क्या-क्या प्रावधान?

पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, यह संशोधन कानून को और सख्त बनाने और तेज़ी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है ताकि इन सभी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़े और बहाल हो सके… धारा 10 की उप-धारा 1 में प्रावधान था कि इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को कम से कम 3-5 साल की सज़ा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.

उन्होंने कहा कि आज लाए जा रहे संशोधन के तहत, सज़ा की यही अवधि कम से कम 5-10 साल और जुर्माना 50 लाख रुपये तक कर दिया गया है. 2024 के कानून में सर्विस प्रोवाइडर के लिए सजा के तौर पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना था. अब इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किया जा रहा है. 2024 के कानून में यह भी लिखा था कि प्रोवाइडर को अगले 4 वर्षों तक कोई भी परीक्षा आयोजित करने से रोक दिया जाएगा. आज, इस संशोधन के तहत उस अवधि को बढ़ाकर 8 साल किया जा रहा है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंत में, संगठित अपराध करने वालों के मामले में, जहां माफिया गिरोह पाया जाता है, पहले सज़ा 5-10 साल थी. इसे बढ़ाकर 7-10 साल कर दिया गया है और जुर्माना पहले 1 करोड़ रुपये तक था. अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है और सबसे महत्वपूर्ण बात, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने वीडियो के माध्यम से भी किया था, वह है तेज़ी से न्याय सुनिश्चित करना. हम परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करेंगे… हमने उसमें भी एक समय सीमा तय की है. जांच 2 महीने की अवधि के भीतर पूरी होनी चाहिए, चाहे वह केंद्रीय एजेंसी हो या विशेष कार्य बल.

गौरव गोगोई बोले- बिल बस दिखावा

डॉ जितेंद्र सिंह के बाद कांग्रेस की ओर से चर्चा की शुरुआत गौरव गोगोई ने की. उन्होंने पेपर लीक को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा. गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार शिक्षा विभाग को लेकर गंभीर नहीं है. एंटी पेपर लीक बिल सिर्फ दिखावे के लिए है. 2024 में ये बिल लाया गया था. उस समय सरकार ने इसे ऐतिहासिक बताया था.

गोगोई ने कहा कि पुराने बिल में संशोधन कर नया बताया गया है. 2024 में भी सरकार ने बड़ी-बड़ी बातें की थीं. उस वक्त यूजीसी को लेकर लोगों में चिंता थी. नीट-यूजी 2024 के 45 में से 41 अभियुक्तों को जमानत मिल चुकी है. उस समय भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ही थे. इस्तीफे के बाद भी धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान किया गया. व्यापक चर्चा के बजाय सोशल मीडिया पर फोकस किया जा रहा है.

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते 21 बच्चों ने अपनी जान दे दी. जब वे इस्तीफा देने के बाद संसद परिसर में आए तो BJP सांसदों ने उनका ऐसे स्वागत किया, जैसे वो पाकिस्तान से जंग लड़कर आए हों. NTA के बड़े अधिकारी विशेष संगठन से जुड़े हैं. NTA के चेयरमैन को सरकार बचा रही है. बच्चों के दुख को समझना होगा.

उन्होंने कहा कि सरकार के रवैये से हताश छात्र आत्महत्या कर रहे हैं. आज छात्र नाराज हैं, दुखी हैं. छात्र आज सरकार से सवाल नहीं पूछ सकते. पेपर लीक से छात्रों पर मानसिक दबाव है. घर में बिना बताए छात्र दिल्ली आए, प्रोटेस्ट में शामिल हुए.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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