छत्तीसगढ़: स्व-सहायता समूह से बदली किस्मत, मुडपार की रेवती निषाद बनी सफल ग्रामीण उद्यमी

धमतरी: धमतरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मुडपार की रहने वाली श्रीमती रेवती निषाद ने मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर ग्रामीण उद्यमिता की मिसाल पेश की है. कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली रेवती आज बांस कला, मछली पालन, बकरी पालन और किराना दुकान जैसे कार्यों से परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
10 अप्रैल 1987 को एक सामान्य ग्रामीण परिवार में जन्मी रेवती निषाद का जीवन पहले सीमित आय और संघर्षों से भरा था . खेती पर निर्भरता और कम आमदनी के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल होता था . वर्ष 2017 में गांव में “नई किरण महिला स्व-सहायता समूह” से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई. समूह के माध्यम से उन्हें बचत की आदत पड़ी और योजनाओं की जानकारी मिली.
26 फरवरी 2024 से उन्होंने बांस कला का 10 दिन का प्रशिक्षण लिया . साथ ही के माध्यम से भी विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया . प्रशिक्षण के बाद रेवती ने घर पर ही बांस से टोकरी, सूपा और सजावटी सामान बनाना शुरू किया . उनके बनाए उत्पाद स्थानीय बाजार में पसंद किए जाने लगे और इससे उन्हें सालाना करीब 50 हजार रुपये की आय होने लगी.
इसके अलावा परिवार के दो तालाबों में मछली पालन, बकरी पालन और पति के साथ किराना दुकान के संचालन से भी आय बढ़ी है . इन सभी गतिविधियों से अब उनके परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो चुकी है.
रेवती अब गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं और भविष्य में अपने बांस कला व्यवसाय को बड़े बाजार तक पहुंचाने की योजना बना रही हैं.










