खंडवा में मकान तोड़ने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट, मकान मालिक से हुई तीखी बहस, जमीन की नपती और लिखित नोटिस की मांग


खंडवा शहर के कल्लनगंज इलाके में पुराने मकान और रास्ते की जमीन को लेकर विवाद देखने को मिला। दरअसल सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर अतिक्रमण की शिकायत पर मौके पर पहुंचे थे। वहीं मकान मालिक जाहिद खान ने कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पहले उन्हें लिखित नोटिस दिया जाए और जमीन की सही नपती कराई जाए। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच तीखी बहस हुई। मामले में मकान मालिक ने कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
वहीं मौके पर जाहिद खान ने कहा कि यदि प्रशासन उनके मकान या निर्माण को अतिक्रमण मान रहा है तो पहले जमीन की सीमाओं की नपती कराई जाए और उन्हें लिखित सूचना दी जाए। उनका कहना था कि किसी एक निर्माण को लेकर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित जमीन और आसपास के निर्माणों की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी पक्षों की जमीन की नपती एक समान तरीके से कराई जाए ताकि विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
कानूनी प्रक्रिया का सामना करने को तैयार: जाहिद खान
जाहिद खान के मुताबिक यदि जांच में उनका निर्माण नियमों के खिलाफ पाया जाता है तो वे कानूनी प्रक्रिया का सामना करने को तैयार हैं। हालांकि उनका कहना है कि उन्हें अपना पक्ष रखने और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज पेश करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके मकान को लेकर बार-बार कार्रवाई की कोशिश की जा रही है।
सिटी मजिस्ट्रेट की टिप्पणी पर उठाए सवाल
दरअसल मकान की नपती और कार्रवाई को लेकर हुई बहस के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर की ओर से कहा गया कि “तुम्हारे बाप का राज है क्या?” बातचीत के दौरान “नपती नहीं करने देगा क्या, तू सिखाएगा हमें” जैसी टिप्पणी किए जाने का भी दावा किया गया है। जाहिद खान ने इन शब्दों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कार्रवाई करनी है तो नियमों के अनुसार की जाए। हालांकि इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
वहीं विवाद से जुड़ा एक दूसरा पहलू संपत्ति और रास्ते को लेकर पहले से चल रहा कानूनी पत्राचार है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जाहिद खान की ओर से उनके अधिवक्ता ने 3 अक्टूबर 2026 को एक सूचना पत्र भेजा था। इसके जवाब में संबंधित पक्ष ने रास्ते पर अतिक्रमण के आरोपों से इनकार किया है। जवाब में वर्ष 1972 के पारिवारिक बंटवारे, करीब 40 से 45 साल से लोहे के गेट के इस्तेमाल और रास्ते से जुड़े पुराने न्यायालयीन मामलों का हवाला दिए जाने की बात सामने आई है।
अस्पताल की बाउंड्रीवॉल को लेकर भी उठाए सवाल
दरअसल जाहिद खान ने पुराने निर्माण और अस्पताल की बाउंड्रीवॉल का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि संबंधित निर्माण काफी पुराना है और अस्पताल की बाउंड्रीवॉल करीब दस साल पहले बनाई गई थी। ऐसे में किसी भी कार्रवाई से पहले जमीन की सीमाओं, राजस्व रिकॉर्ड और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि नपती सभी संबंधित पक्षों की मौजूदगी में कराई जाए, ताकि जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
सुशील विधाणी, खंडवा











