अहिवारा में सीएमओ पर 50% कमीशन मांगने का आरोप, ऑडियो वायरल होने से मचा हड़कंप

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के अहिवारा नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। यहां के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) अंकुर पांडेय पर प्रधानमंत्री आवास योजना के बिल पास कराने के नाम पर 50 प्रतिशत कमीशन मांगने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में दो लोगों ने शिकायत की है और एक ऑडियो क्लिप वायरल हो रही है, जिसमें सीएमओ की कथित आवाज सुनी जा सकती है।
पहली शिकायत आवास प्रेरक अंशुल मोराने ने की है। अंशुल का कहना है कि सीएमओ पांडेय ने आर्किटेक्ट राहुल देवकर के 5.78 लाख रुपये के बिल में से आधी रकम रिश्वत के तौर पर मांगी। उन्होंने बताया कि दबाव में आकर 1.39 लाख रुपये नकद दे भी दिए, लेकिन बाकी राशि न देने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी गई। इसके बाद उनके खिलाफ कार्य में लापरवाही का आरोप लगाकर बर्खास्त कर दिया गया।
दूसरी शिकायत वास्तुविद सलाहकार चितरंजन अग्रवाल ने दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने 1 मई 2025 को 2.22 लाख रुपये का बिल जमा किया था, लेकिन 50 प्रतिशत कमीशन न देने के कारण पांच महीने से भुगतान लंबित है। चितरंजन का आरोप है कि सीएमओ ने उनके बिल को रोक रखा है और जब तक रिश्वत नहीं दी जाएगी, भुगतान नहीं होगा।
अंशुल मोराने ने दावा किया कि सीएमओ ने उन्हें और राहुल देवकर को तालाब के पास बुलाकर धमकाया और बाकी रकम लाने का दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पैसे देने से मना किया, तो झूठे आरोप लगाकर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
इस पूरे मामले को लेकर अहिवारा नगर पालिका अध्यक्ष विद्यानंद कुशवाहा ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है। उन्होंने कलेक्टर, एसडीएम और नगरीय प्रशासन को पत्र लिखकर जांच की मांग की है और कहा कि जांच पूरी होने तक दूसरे सीएमओ की नियुक्ति की जाए।
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। भिलाई-3 एसडीएम महेश सिंह राजपूत को जांच सौंपी गई है।
वहीं, सीएमओ अंकुर पांडेय ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि ऑडियो फर्जी है और एआई से तैयार किया गया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें फंसाने की साजिश रची जा रही है, क्योंकि उन्होंने कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि वायरल ऑडियो असली है या फर्जी, लेकिन फिलहाल इस मामले ने नगर पालिका प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।










