लहसुन के दामों में गिरावट, एक सप्ताह में 1700 क्विंटल आवक लेकिन भाव 1500 रुपए गिरे

शाजापुर। वर्षा के मौसम में कृषि उपज मंडी शाजापुर में जहां लहसुन की आवक धीमी हो गई है, वहीं दूसरी ओर दामों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। 24 से 30 जून के बीच लहसुन की कुल आवक लगभग 1700 क्विंटल रही, लेकिन इस कम आवक का बाजार पर कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ा। आमतौर पर जब आवक घटती है तो भाव बढ़ने की संभावना रहती है, लेकिन इस बार उल्टा हो रहा है, भावों में करीब 1500 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है।
बाजार में लहसुन की मांग कम
व्यापारियों का कहना है कि इस समय बाजार में लहसुन की मांग कम बनी हुई है। उपभोक्ता स्तर पर खपत जरुरत के अनुसार कम हो रही है, जिससे व्यापारी अधिक स्टॉक उठाने से बच रहे हैं। इसके अलावा इस वर्ष शाजापुर जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में लहसुन का उत्पादन अच्छा रहा है। व्यापारी यह भी मानते हैं कि भावों में अभी स्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन फिलहाल तेजी की उम्मीद कम ही है।
पुराने स्टॉक को निकालना भी चुनौतीपूर्ण
24 जून को शाजापुर मंडी में लहसुन का अधिकतम भाव 8100 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचा था, जबकि मॉडल रेट 5600 रुपए और न्यूनतम भाव करीब 1500 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। लेकिन मात्र एक सप्ताह में ही दाम तेजी से नीचे लुढ़के। 30 जून को लहसुन की कुल आवक 263 क्विंटल रही और न्यूनतम भाव 2000 रुपए तथा अधिकतम भाव 6500 रुपए प्रति क्विंटल पर सिमट गया। किसानों के लिए यह गिरावट चिंता का विषय बन रही है।
किसान अब नई फसल की तैयारी में जुटे
मानसून की दस्तक के साथ ही कई किसान अब नई फसल की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन पुराने स्टॉक को निकालना भी उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। व्यापारी वर्ग भी इस बात को मानता है कि यदि स्टॉक का दौर लंबे समय तक जारी रहा और स्टोरेज की समस्याएं बनी रहीं, तो लहसुन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और इससे बाजार भाव और भी नीचे जा सकते हैं। वहीं बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि आगामी सप्ताहों में मांग बढ़ने पर कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन यह सुधार स्थायी होगा या अस्थायी, यह कहना फिलहाल मुश्किल है।
रसोई में लहसुन का इस्तेमाल काफी कम
प्याज की तुलना में रसोई में लहसुन का इस्तेमाल काफी कम होता है, खुदरा बाजार में लहसुन 100-150 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है। लहसुन की नई फसल जनवरी में आनी शुरू हो जाती है। बेहतर दाम व अच्छी क्वालिटी की लहसुन होने के बाद भी कम दाम मिलने से किसान नाराज दिखाई दे रहे हैं। लहसुन के भाव में तेजी की उम्मीद लगाए बैठे किसान निराश हैं।
नियंत्रण न होने से किसानों का शोषण
किसान जीतमल पाटीदार, रामप्रसाद वर्मा आदि का कहना है कि लहसुन के दाम गिरने से किसानों को लहसुन और प्याज के दाम कम मिल रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कम दाम मिल रहे हैं और मंडी प्रशासन का कोई नियंत्रण न होने से किसानों का शोषण हो रहा है। वर्षा के कारण आवक अभी कम हैं, वहीं भाव में भी अभी नरमी देखने को मिल रही है।
‘लहसुन के भाव डिमांड के ऊपर निर्भर करते हैं। अभी पड़ोसी देशों में निर्यात बंद होने का असर भी देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में डिमांड बढ़ेगी तो दाम में भी बढ़ोतरी हो सकती है।’








