उमरिया में कंपनी अधिकारियों के खिलाफ आदिवासी ग्रामीणों का प्रदर्शन, 13 घंटे थाने के बाहर बैठे, FIR की मांग, जानिए क्या है पूरा मामला?

उमरिया के पाली थाना क्षेत्र के गिठोरी गांव में बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच विवाद के बाद आदिवासी महिला-पुरुषों ने करीब 13 घंटे तक थाने के बाहर आंदोलन किया। दरअसल ग्रामीणों ने कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाली-गलौज, अभद्रता और मारपीट के आरोप लगाए हैं। महिला का अस्पताल में MLC कराया गया। पुलिस के कार्रवाई के आश्वासन के बाद देर रात आंदोलन खत्म हुआ लेकिन FIR दर्ज नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।

दरअसल ग्रामीणों का आरोप है कि विवाद के दौरान कंपनी से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। महिलाओं ने मारपीट के भी आरोप लगाए हैं। मामले में पुलिस ने संबंधित महिला को अस्पताल भेजकर उसका मेडिकल लीगल केस यानी MLC कराया। इसके बाद पुलिस की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने पर आंदोलन समाप्त कर दिया गया।

थाने के बाहर जुटे आदिवासी ग्रामीण

जानकारी के मुताबिक शासन की ओर से बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड को कोल आवंटन मिलने के बाद ग्राम गिठोरी क्षेत्र में कोयला उत्खनन की तैयारियां की जा रही हैं। इसी दौरान कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों तथा ग्रामीणों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और मामला मारपीट तक पहुंच गया। वहीं घटना के बाद आदिवासी महिला और पुरुष अपनी शिकायत लेकर पाली थाने पहुंचे। ग्रामीणों की मांग थी कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोप लगाए जा रहे हैं उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और कानूनी कार्रवाई की जाए। इसी मांग को लेकर उन्होंने थाने के बाहर आंदोलन शुरू कर दिया।

13 घंटे तक महिला और पुरुष थाने में मौजूद रहे

दरअसल आंदोलन सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ और रात लगभग 12 बजे तक चलता रहा। करीब 13 घंटे तक महिला और पुरुष थाने में मौजूद रहे। इस दौरान ग्रामीण अपनी मांग पर कार्रवाई की बात कहते रहे। उनका कहना था कि शिकायत के बाद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की जानी चाहिए। मामले के दौरान पुलिस ने संबंधित महिला को अस्पताल भेजा, जहां उसका MLC कराया गया। मेडिकल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसी आश्वासन के बाद देर रात ग्रामीणों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। हालांकि, ग्रामीणों की मुख्य मांग कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की थी, जिसे लेकर उन्हें तत्काल कार्रवाई नहीं मिली।

कांग्रेस नेताओं ने दी दोबारा आंदोलन की चेतावनी

आंदोलन खत्म होने के बाद भी मामले को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी बनी हुई है। उनका कहना है कि पुलिस से उन्हें कार्रवाई की उम्मीद है और आरोपों की जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने अधिकार और सम्मान की बात को लेकर थाने पहुंचे थे और उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उन्हें पाली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भरोसा नहीं है। उनका आरोप है कि यदि बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीणों के साथ मिलकर दोबारा आंदोलन किया जाएगा।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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