देहदान: जीवनभर कर्मयोगी बनकर कुरुद के देवसिंह सोनबेर ने की देश सेवा, मरणोपरांत भी बने मानवता की मिसाल

कुरुद: एक कर्मयोगी के रूप में जिन्होंने अपना पूरा जीवन शासकीय सेवा में समर्पित किया, मरणोपरांत भी मानवता की सेवा की मिसाल बन गए. धमतरी जिले के नवागांव(कुरुद) निवासी देवसिंह सोनबेर का पार्थिव शरीर शिक्षा एवं अनुसंधान के उद्देश्य से पं. जे.एन.एम. मेडिकल कॉलेज रायपुर को सोनबेर के परिजनों ने उनके अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए सौंप दिया है.
गौरतलब हो कि अपने पूरे जीवनकाल में स्व. देवसिंह सोनबेर  शरीर के महत्व और चिकित्सा शिक्षा में उसकी आवश्यकता को भली-भांति समझते थे. यही कारण था कि उन्होंने अपनी मृत्यु के बाद भी शरीर को चिकित्सीय अनुसंधान और शिक्षा के लिए समर्पित करने की इच्छा व्यक्त की थी. उनकी इस महान इच्छा का सम्मान करते हुए सोनबेर परिवार ने उनका देहदान किया, जिससे भावी चिकित्सकों को प्रशिक्षण और शोध में अमूल्य सहयोग मिलेगा. यह प्रेरणादायी कदम समाज में देहदान के महत्व को नई दिशा देता है. मरणोपरांत उनके इस अमूल्य योगदान के लिए पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के एनाटॉमी अर्थात शरीर रचना विज्ञान विभाग के द्वारा उनके परिवार को देहदान का सर्टिफिकेट भी प्रदान किया गया.
चिकित्सा शिक्षा में अमर हुए देवसिंह सोनबेर 
​सेवा, सादगी और सत्यनिष्ठा को अपना जीवन-मूल्य बनाने वाले नवागांव (कुरुद) निवासी देवसिंह सोनबेर (4 दिसंबर 1943 – 6 नवंबर 2025) ने 81 वर्ष की आयु में इस संसार को अलविदा कहा. उनका जीवन जितना कर्तव्यनिष्ठ रहा, उनकी विदाई उतनी ही प्रेरणादायक और असाधारण साबित हुई. जीवनभर कर्मयोगी रहे सोनबेर ने देहांत के उपरांत अपनी देह का दान मेडिकल कॉलेज, रायपुर को कर दिया, जिससे वह मृत्यु के बाद भी चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ज्ञान के दीप जलाते रहेंगे. ​अब उनकी देह मेडिकल कॉलेज, रायपुर के छात्रों के लिए एक खुली किताब होगी.
देवसिंह का जीवन​ अनुशासित और समर्पित रहा
​स्व. जेठी बाई साहू एवं स्व. शिवप्रसाद साहू के उच्च संस्कारों में पले देवसिंह सोनबेर ने अपनी स्नातक शिक्षा पूरी करने के बाद राष्ट्र सेवा को प्राथमिकता दी. उन्होंने अपनी युवावस्था में भारतीय सेना में मिलेट्री वारंट ऑफिसर के रूप में कठोर अनुशासन का पालन करते हुए देश की सेवा की. ​सेना से निवृत्ति के बाद, उन्होंने भारतीय डाक विभाग में अपनी सेवाएँ दीं, जहाँ वे डाक निरीक्षक व पोस्ट मास्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे. अपनी हर भूमिका में, वे अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतिमान बने रहे, जिन्होंने लाखों लोगों को प्रेरित किया.
व्यक्तित्व ​संत स्वभाव और आध्यात्मिक लगाव के रहे
​कर्म से अधिकारी होते हुए भी, उनका स्वभाव संतों जैसा था. आध्यात्मिक रूप से वे सद्गुरु स्व. अभिलाष साहेब और कबीर पारख संस्थान प्रयागराज से प्रेरित थे. प्रजापिता ब्रह्माकुमारी माउंट आबू से भी उनका भावनात्मक लगाव जीवनभर बना रहा. उनका अध्यात्म किसी पर थोपना नहीं था, बल्कि अपने शांत, संयमित और सत्यनिष्ठ कर्मों से लोगों को सही जीवन जीना सिखाना था. स्व. देवसिंह सोनबेर अपने पीछे एक भरा-पूरा और समृद्ध परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें पुत्र मुरलीधर, देवेन्द्र दास (संत), धनेश्वर सहित नाती-पोते शामिल हैं. उनके अंतिम विदाई में कबीर आश्रम से पहुंचे संतो ने भाव भरा श्रधांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मरकर भी जो समाज को सीखा जाते है वहीं सच्चा महापुरुष होते है.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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