नशे में धुत बैंक मैनेजर का उत्पात: किसान से गाली-गलौज व मारपीट की कोशिश, वीडियो वायरल होते ही निलंबित

सूरजपुर: रामानुजनगर स्थित जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक में उस समय हड़कंप मच गया, जब बैंक के मैनेजर ने एक खाताधारक किसान के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की और मारपीट पर उतारू हो गया. बैंक परिसर में मौजूद सैकड़ों किसानों ने जब यह दृश्य देखा तो अफरा-तफरी की स्थिति बन गई. बताया जा रहा है कि मैनेजर कथित तौर पर शराब के नशे में था और धान बिक्री की राशि निकालने पहुंचे किसानों से दुर्व्यवहार कर रहा था.
बीमार किसान से भी नहीं दिखाई मानवीयता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम सुमेरपुर निवासी खाताधारक राजाराम यादव, जिनका स्वास्थ्य खराब था, डॉक्टर से परामर्श लेकर दवा की पर्ची के साथ बैंक पहुंचे थे. उन्होंने मात्र 1500 रुपये की निकासी के लिए पर्ची भरी थी. बताया जाता है कि बैंक मैनेजर अपने निर्धारित चेंबर में न बैठकर नशे की हालत में बैंक परिसर के एक कोने में सोया हुआ था. जब पीड़ित किसान राजाराम यादव उससे निकासी के संबंध में संपर्क करने गया, तो मैनेजर अचानक आगबबूला हो गया और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए भद्दी-भद्दी गालियां देने लगा. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मारपीट की नौबत आ गई.
वीडियो वायरल, अधिकारी हरकत में
घटना के दौरान मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. साथ ही मामले की सूचना जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के संभागीय उपाध्यक्ष एवं वाइस चेयरमैन जगदीश साहू को दी गई. सूचना मिलते ही उपाध्यक्ष तत्काल बैंक पहुंचे. हालांकि उपाध्यक्ष के बैंक पहुंचने से पहले ही आरोपी मैनेजर मौके से फरार हो चुका था. बैंक में मौजूद किसानों ने उपाध्यक्ष के सामने मैनेजर की शिकायतें रखीं और बैंक की अव्यवस्था से अवगत कराया.

तत्काल निलंबन, नई पोस्टिंग का भरोसा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वाइस चेयरमैन जगदीश साहू ने बैंक के सीईओ से दूरभाष पर चर्चा कर आरोपी मैनेजर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. किसानों ने उपाध्यक्ष के समक्ष मांग रखी कि पूर्व में रामानुजनगर में पदस्थ रहे प्रबंधक श्यामलाल सिंह को पुनः यहां का प्रबंधक बनाया जाए.
इस पर उपाध्यक्ष ने किसानों को आश्वस्त किया कि अगले ही दिन बैंक में नए मैनेजर की पोस्टिंग कर दी जाएगी. धान भुगतान जैसे संवेदनशील समय में बैंक अधिकारियों का ऐसा गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार न केवल किसानों के भरोसे को तोड़ता है, बल्कि सहकारी व्यवस्था की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है.











