3 साल के बच्चे की मौत के मामले में मिठाई दुकानदार पर FIR, जावरा में बर्फी खाने के बाद माता-पिता की भी बिगड़ी थी तबीयत

रतलाम जिले के जावरा में मावे की बर्फी खाने के बाद 3 साल के बच्चे की मौत का मामला अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। दरअसल रिंगनोद पुलिस ने देवश्री नमकीन के संचालक सत्यनारायण पिता चांदमल अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक जांच में सामने आया कि हानिकारक होने के बावजूद मिठाई बेची गई थी जिससे बच्चे आर्यन की तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि मिठाई के सैंपल और बच्चे की विसरा रिपोर्ट आना अभी बाकी है।

दरअसल मामला जावरा के बिनौली गांव में रहने वाले जितेंद्र गोस्वामी के परिवार से जुड़ा है। जितेंद्र ने 7 अक्टूबर की दोपहर कमानी गेट के पास स्थित देवश्री मिठाई की दुकान से मावे की बर्फी खरीदी थी। उसी रात जितेंद्र उनकी पत्नी और बेटे आर्यन ने बर्फी खाई। इसके कुछ समय बाद तीनों को उल्टियां होने लगीं और उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिवार ने पहले स्थानीय स्तर पर इलाज कराया लेकिन बाद में बच्चे और उसकी मां को मंदसौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

इलाज के दौरान बच्चे की मौत

वहीं परिजनों के मुताबिक बर्फी खाने के बाद जब जितेंद्र गोस्वामी, उनकी पत्नी और बेटे आर्यन की तबीयत खराब हुई तो वे सबसे पहले पास के गांव में डॉक्टर के पास पहुंचे। शुक्रवार सुबह परिवार जावरा आया और दो निजी अस्पतालों में इलाज कराने की कोशिश की। इसके बाद शनिवार सुबह वे मंदसौर के एक निजी अस्पताल पहुंचे जहां मां और बेटे को भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान शनिवार दोपहर 3 साल के आर्यन की मौत हो गई।

दुकानदार ने इलाज के लिए 1500 रुपए दिए

वहीं बच्चे की मौत के बाद परिवार ने मिठाई की दुकान से खरीदी गई बर्फी को लेकर सवाल उठाए। मृत बच्चे के चाचा कालू गिरी गोस्वामी ने आरोप लगाया कि घर में लोगों की तबीयत खराब होने के बाद बची हुई मिठाई शुक्रवार को दुकानदार के पास ले जाई गई थी। उनके मुताबिक दुकानदार ने मिठाई लेकर उसे कचरे में फेंक दिया और बच्चे के इलाज के लिए ₹1,500 दिए। चाचा ने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद परिवार को वहां से भगा दिया गया। इन आरोपों के सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच की। रिंगनोद थाना प्रभारी जितेंद्र जादौन के मुताबिक जांच के दौरान यह सवाल भी देखा गया कि दुकानदार ने बची हुई मिठाई को कचरे में क्यों फेंका और इलाज के लिए पैसे क्यों दिए। परिवार के बयान और डॉक्टरों की ओर से फूड पॉइजनिंग बताए जाने की बात को भी जांच में शामिल किया गया। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर दुकान संचालक के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

खाद्य विभाग ने लिए सैंपल

दरअसल आर्यन की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग और ग्रामीण मिठाई की दुकान पर पहुंचे थे। उन्होंने मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध जताया। इस दौरान दुकान के काउंटर के कांच भी तोड़ दिए गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और नाराज लोगों को समझाकर कार्रवाई का भरोसा दिया। घटना के बाद खाद्य विभाग की टीम ने भी दुकान पर पहुंचकर मिठाई और नमकीन के सैंपल लिए थे।

सैंपल रिपोर्ट आना बाकी

फिलहाल खाद्य विभाग की सैंपल रिपोर्ट आना बाकी है। इसके अलावा मृत बच्चे की विसरा रिपोर्ट का भी इंतजार है। इन रिपोर्टों से मामले की जांच में अहम जानकारी मिल सकती है। पुलिस ने अभी दुकानदार के खिलाफ FIR दर्ज की है जबकि मिठाई के नमूने की रिपोर्ट और विसरा रिपोर्ट के नतीजे सामने आने बाकी हैं। इसलिए मिठाई के कारण ही मौत हुई इसकी पुष्टि से जुड़े सभी पहलुओं पर जांच जारी है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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