इटावा: फर्जी फर्म बनाकर 2.01 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा, FIR के बाद पहली गिरफ्तारी

जसवंतनगर/इटावा: फर्जी फर्म के जरिए करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस और राज्य कर विभाग की कार्रवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. 2.01 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में पहले ही आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा चुका था और अब इस प्रकरण में पुलिस ने एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है. इस बड़ी कार्रवाई के बाद जनपद भर में हड़कंप मच गया है और फर्जीवाड़ा करने वाले कारोबारियों में भय का माहौल है.
राज्य कर विभाग इटावा की विशेष अनुसंधान शाखा द्वारा की गई गहन जांच में यह गंभीर मामला सामने आया. जांच के दौरान पता चला कि “स्वस्ति भारत बिल्डिंग मेटेरियल” नामक फर्म को फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित जानकारी के आधार पर पंजीकृत कराया गया था. इस फर्म के जरिए बिना किसी वास्तविक व्यापारिक गतिविधि के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को पास ऑन किया जा रहा था, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया.
जांच रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर माह की जीएसटीआर-3बी रिटर्न में लगभग 3.89 करोड़ रुपये की बिक्री दर्शाई गई, जबकि यह बिक्री केवल कागजों तक सीमित थी. पूरी कर देयता को आईटीसी से समायोजित कर दिया गया, जबकि जीएसटीआर-2ए में किसी प्रकार की आईटीसी उपलब्ध ही नहीं थी. जब विभागीय टीम ने मौके पर जाकर सत्यापन किया तो घोषित व्यापार स्थल पूरी तरह बंद मिला और पोर्टल पर दर्ज मोबाइल नंबर भी बंद पाया गया. इससे यह स्पष्ट हो गया कि फर्म पूरी तरह फर्जी थी और केवल जीएसटी चोरी के उद्देश्य से बनाई गई थी.
इस गंभीर अनियमितता के आधार पर थाना जसवंतनगर में जीएसटी अधिनियम सहित आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 34 एवं 120बी के तहत पहले ही मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए थाना जसवंतनगर में पंजीकृत मु0अ0सं0 296/25 के अंतर्गत अभियुक्त जीसान (28 वर्ष) पुत्र हारून, निवासी 125 साहकमर, थाना कोतवाली, जनपद इटावा को गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) एवं 61(2) के तहत विधिक कार्रवाई की है. सूत्रों के अनुसार, इस जीएसटी घोटाले में अन्य लोगों की भूमिका भी संदिग्ध है और उनकी तलाश के लिए जांच लगातार जारी है. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही और बड़े खुलासे हो सकते हैं. इस कार्रवाई से जीएसटी चोरी करने वालों को सख्त संदेश गया है कि कानून के शिकंजे से कोई नहीं बच सकेगा.











