अर्थव्यवस्था से ऊर्जा तक… भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नई शुरुआत, कैसे पत्रकार बनेंगे संवाद की कड़ी?

भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशों के बीच, लोगों के आपसी मेल-जोल को बढ़ाने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है. अब इस प्रक्रिया में दोनों देशों की मीडिया और पत्रकारों को शामिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं. ढाका में भारतीय उच्चायोग ने बांग्लादेशी पत्रकारों के लिए भारत में क्षमता-निर्माण का एक विशेष कार्यक्रम शुरू करने का ऐलान किया है.
ITEC योजना के तहत आयोजित होने वाला यह कोर्स “पत्रकारिता और जनसंपर्क” पर आधारित है और हैदराबाद में 25 से 31 अक्टूबर तक चलेगा. यह प्रोग्राम खास तौर पर उन बांग्लादेशी पत्रकारों पर केंद्रित है जो अर्थव्यवस्था, वित्त, व्यापार और ऊर्जा क्षेत्रों की कवरेज करते हैं. इस प्रोग्राम की एक खास बात यह है कि यह सिर्फ पत्रकारिता की ट्रेनिंग तक ही सीमित नहीं है; पत्रकारों को मीडिया संबंध, रणनीतिक संचार और मास मीडिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका जैसे विषयों के बारे में जानकारी मिलेगी.
इसके अलावा, उन्हें HITEC सिटी हैदराबाद के साथ-साथ भारतीय स्टार्टअप्स और उद्यमियों से बातचीत करने का मौका भी मिलेगा. कुल मिलाकर, इस प्रोग्राम का मकसद पत्रकारों को भारत के टेक्नोलॉजी, बिजनेस और इनोवेशन इकोसिस्टम से सीधे तौर पर परिचित कराना है.
दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति के बाद आपसी संबंधों पर जोर
यह पहल ऐसे समय में की गई है जब भारत के नए हाई कमिश्नर, दिनेश त्रिवेदी, भारत-बांग्लादेश संबंधों में लोगों के बीच आपसी रिश्तों को मजबूत करने की लगातार वकालत कर रहे हैं. 1 सितंबर को त्रिवेदी ने कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंध दोनों देशों के लोगों के बीच के रिश्तों पर आधारित हैं और दोनों देशों को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अतीत में उलझे रहने के बजाय, दोनों देशों को अपने लोगों की भलाई और विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए.
2 सितंबर को बांग्लादेश की संसद के स्पीकर के साथ बैठक के दौरान, त्रिवेदी ने ‘बांग्लादेश-भारत संसदीय मैत्री समूह’ बनाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने सुझाव दिया कि लोगों के बीच आपसी रिश्तों को मज़बूत करने के लिए दोनों देशों के सांसदों को नियमित बातचीत करनी चाहिए और विचारों का आदान-प्रदान करना चाहिए.
रिश्तों को ‘फिर से पटरी पर लाने’ की कोशिश
2024 के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंधों को मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा है. इसी पृष्ठभूमि में, भारत ने अप्रैल 2026 में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में हाई कमिश्नर नियुक्त किया और उन्होंने जून में ढाका में अपना पद संभाला. तब से, त्रिवेदी ने लगातार बातचीत और रचनात्मक जुड़ाव पर जोर दिया है. अगस्त में उन्होंने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की, जहां उन्होंने बातचीत के ज़रिए दोनों देशों के बीच मतभेदों को सुलझाने की ज़रूरत पर जोर दिया.
भारत में पत्रकारों के लिए अभी जो कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, वह महत्वपूर्ण है, यह एक ऐसी पहल है जो सरकारी बातचीत से आगे बढ़कर पेशेवर और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव का रास्ता बनाती है.
भारत का फोकस, कनेक्टिविटी के नए रास्ते
समग्र रूप से देखें तो ये घटनाक्रम तीन स्तरों पर बातचीत को बढ़ाने की कोशिशों को दर्शाते हैं, कूटनीतिक बातचीत, संसदीय संबंध और अब, मीडिया-स्तर पर जुड़ाव. हालांकि, इस ITEC कार्यक्रम को भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक औपचारिक कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखना गलत होगा. हाई कमीशन की सूचना में इस कार्यक्रम को सिर्फ ‘क्षमता-निर्माण कोर्स’ बताया गया है. फिर भी, इसके समय और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को लेकर हालिया बयानों को देखते हुए, इसे द्विपक्षीय जुड़ाव के व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है.











