शाही से लेकर बेदाना तक…भारत में उगाई जाती हैं ये 7 तरह की लीची

भारत में गर्मी के फल लीची का सबसे ज्यादा प्रोडक्शन बिहार के मुजफ्फरपुर में किया जाता है. इस जगह को कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड के नाम से भी जाना जाता है. यहां की लीची को बेहतरीन क्वालिटी के लिए जाना जाता है. खासकर शाही लीची दुनियाभर में पसंद की जाती है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी मांग है. पूरी दुनिया में भारत लीची के उत्पादन में दूसरे नंबर पर आता है, क्या आपको पता है कि हमारे यहां कितनी तरह की लीची उगाई जाती है.

लीची की कम से कम 100 से भी ज्यादा किस्में उगाई जाती हैं. हालांकि भारत में इसकी 7 से 8 वैरायटी की पैदावार होती है. हर लीची को उसके अलग स्वाद और सुगंध के लिए जाना जाता है. तो चलिए जान लेते हैं 7 अलग-अलग तरह की लीची कौन सी है.

शाही लीची है बेहद खास
बिहार के मुजफ्फरपुर की शाही लीची बेहद खास है. स्वाद-सुगंध और क्वालिटी के मामले में ये सबसे बेहतरीन मानी जाती है. यहां तक कि शाही लीची को जीआई टैग भी मिला हुआ है. भारत के बाजारों के अलावा इसे विदेशों में भी निर्यात किया जाता है.

बेदाना लीची
इस लीची का नाम उसके टेक्सचर की वजह से पड़ा है, दरअसल इस लीची के बीज बहुत छोटे होते हैं. ऐसा लगता है कि इसमें बीज (दाना) है ही नहीं. इस वजह से इसे बेदाना लीची के नाम से जाना जाता है. बीज बहुत छोटे होते हैं और यही कारण है कि इस लीची में पल्प काफी ज्यादा होता है. ये काफी मीठी और जूसी होती है.

अर्ली बेदाना
बेदाना की तरह ही ये लीची भी छोटे बीज वाली होती है, जिसमें 70 प्रतिशत से ज्यादा पल्प (गूदा) पल्प होता है. इस लीची में अर्ली शब्द इसलिए लगाते हैं, क्योंकि ये बहुत जल्दी पकने वाली वैरायटी है. तकरीबन 120 से 135 दिन यानी 4 से साढ़े 4 महीने में ये लीची हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाती है.

चाइना लीची

बिहार के मुजफ्फरपुर के अलावा यहां के अलग-अलग हिस्सों में चाइना लीची भी उगाई जाती है. ये आकार में गोल होती है और इसके छिलके नारंगी-लाल रंग के होते हैं. ये खाने में बहुत मीठी लीची होती है.

देहरादून लीची

ये लीची उत्तर भारत के कई क्षेत्रों के अलावा मुख्य रूप से उत्तराखंड में उगाई जाती है. ये लीची अपने रसीले टेक्सचर के लिए जानी जाती है. इसका छिलका पकने पर गुलाबी या फिर गहरे लाल रंग का हो जाता है. इसकी मिठास फूलों जैसी ताजगी फील कराती है.

रोजसेंटेड लीची

देहरादून की ही एक किस्म है रोजसेंटेड लीची. देहरादूनी रोजसेंटेड लीची की मिठास विदेशों तक पहुंची हुई है. इस लीची का नाम ही इसकी खासियत को बताता है. ये लीची बिल्कुल गुलाब की सुगंध की तरह महकती है. इस लीची को खाते वक्त भी आपको इसकी मिठास में गुलाब जैसा स्वाद महसूस होगा.

बॉम्बे लीची

इस लीची की खासियत है कि इसका आकार काफी बड़ा होता है और ये थोड़ी दिल जैसी शेप में लगती है. ये किस्म भी मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और बिहार में उगाई जाती है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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