छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में 9 साल की छात्रा जापानी इंसेफेलाइटिस से संक्रमित, अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य विभाग

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में एक 9 साल की छात्रा जापानी इंसेफेलाइटिस से संक्रमित पाई गई है। तेज बुधार के बाद वह मेडिकल कॉलेज लाई गई। जहां उसमें JE संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। इसे रोकने के लिए निगरानी और जांच तेज कर दी गई है।
आपको बता दें जगदलपुर में ये केस मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। यहां के लोहंडीगुड़ा, नानगुर, दरभा क्षेत्र हॉटस्पॉट बने हैं। जहां पर इनके संक्रमण का खतरा ज्यादा हैं इसके अलावा बकावंड क्षेत्र पर भी स्वास्थ्य विभाग की नजर है।
क्या होता है जापानी इंसेफेलाइटिस
जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis) एक गंभीर वायरल बीमारी है। जो जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस के कारण होती है। माना जाता है कि ये वायरस संक्रमित क्यूलेक्स (Culex) मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलता है। जो मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र यानी दिमाग और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है और मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकता है।
कैसे फैलती है
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ये वायरस प्राकृतिक स्रोतों में मुख्य रूप से जंगली पक्षियों और सूअरों में पनपता है। जब कोई मच्छर संक्रमित सूअर या पक्षी का खून चूसता है और फिर किसी इंसान को काटता है, तो ये वायरस इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाता है। आपको बता दें यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती है।
कहां ज्यादा होती है ये बीमारी
यह बीमारी मुख्य रूप से एशिया के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों (विशेषकर चावल के खेतों के आसपास) में अधिक पाई जाती है।
सामान्य लक्षण:
इस वायरस से ज्यादातर संक्रमित लोगों में या तो कोई लक्षण दिखाई नहीं देते या फिर केवल हल्का बुखार और सिरदर्द होता है।
गंभीर लक्षण: गंभीर मामलों में, वायरस मस्तिष्क तक पहुंच जाता है जिसे एनसेफलाइटिस कहते हैं।
शुरुआती लक्षणों के बाद तेज बुखार, गर्दन में अकड़न, उल्टी, मानसिक भ्रम, दौरे (झटके आना) और कोमा की स्थिति पैदा हो सकती है।
बचाव और उपचार
इस जापानी इंसेफेलाइटिस का उपचार टीकाकरण (Vaccination) है। भारत में बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम में इसे शामिल किया गया है।
मच्छरों से बचाव:
मच्छरों के काटने से बचने के लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
मच्छरदानी का उपयोग करें।
घर के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें।
इलाज: इस बीमारी का कोई विशिष्ट एंटीवायरल इलाज नहीं है।











