धमतरी: बुनकरों को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम, विधायक चंद्राकर ने दिलाई 73 लाख की वित्तीय सहायता

धमतरी: कुरूद विधानसभा क्षेत्र के बुनकरों को सशक्त बनाने की दिशा में अजय चंद्राकर की पहल ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. उनके विशेष प्रयास के चलते क्षेत्र के बुनकर सहकारी समितियों को वर्कशेड, प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों के लिए कुल ₹73 लाख की महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है. यह राशि न केवल बुनकरों की आजीविका सुधारेगी, बल्कि सदियों पुरानी हस्तशिल्प और हैंडलूम कला को भी नई पहचान देगी.

कुरूद क्षेत्र के गुदगुदा, परखंदा, गाड़ाडीह, भेंडरवानी, भोथली और बकली जैसे गाँवों के बुनकरों के लिए यह सहायता एक जीवन-रेखा साबित होगी. स्वीकृत राशि में से ₹52.20 लाख विशेष रूप से बुनकर वर्कशेड सह आवास योजना के लिए आवंटित किए गए हैं. इस पहल से स्थानीय कारीगरों को अपने घरों के पास ही एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक कार्यस्थल मिल पाएगा.
बेहतर कार्य-सुविधा मिलने से बुनकरों की दक्षता और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी. यह सहायता केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि ₹13.60 लाख की राशि नवीन बुनाई प्रशिक्षण पर और ₹7.20 लाख की राशि उन्नत सहायक उपकरण खरीदने पर खर्च की जाएगी, जिससे बुनकर नई तकनीकें सीखकर बाज़ार की प्रतिस्पर्धा में खड़े हो सकेंगे.
आत्मनिर्भर भारत की दिशा कारगार कदम है: अजय चंद्राकर
विधायक अजय चंद्राकर ने बताया कि इस योजना से न केवल बुनकरों को बेहतर कार्यस्थल मिलेगा, बल्कि उनकी आय में भी वृद्धि होगी. नई तकनीक और प्रशिक्षण से पारंपरिक बुनाई को आधुनिक बाज़ार की मांग के अनुरूप बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने, हैंडलूम और हस्तशिल्प परंपरा को पुनर्जीवित करने तथा स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है.
गांवों में महिलाओं को भी मिलेगा रोजगार 
इन बुनकर समितियों के माध्यम से प्रशिक्षण लेकर अब गांवों की और भी महिलाएं घर पर रहकर रोजगार से जुड़ सकेंगी. महिला स्व-सहायता समूहों को बुनकर समितियों से जोड़ा जा रहा है ताकि वे कपड़ा बुनाई, डिजाइनिंग और सिलाई में अपनी भूमिका निभा सकें. इससे न केवल महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण मिलेगा, बल्कि पूरे परिवार की आय में स्थिरता आएगी. ग्रामीण महिलाएं अब पारंपरिक बुनाई को एक नए स्वरूप में अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकेंगी.
पारंपरिक कला को नई पहचान

भारत में बुनकरी सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है. हथकरघा उद्योग देश की सबसे पुरानी और सम्मानित परंपराओं में से एक है. कुरूद क्षेत्र के बुनकर अब आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षण की मदद से सूती, रेशमी और खादी वस्त्रों के उत्पादन में नई ऊंचाइयां छू सकेंगे. विधायक अजय चंद्राकर का कहना है कि यह पहल सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि कला और परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक कदम है. इससे क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे और पलायन की समस्या भी घटेगी.

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