मैं असहाय महसूस कर रही… हेमा मालिनी का लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र जाने क्यों कही …

बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर इस बात पर नाराजगी और दुख व प्रकट किया है कि बंगाल में ममता बनर्जी सरकार में कलाकारों को परफॉर्म करने से रोका जा रहा है. पत्र में उन्होंने लिखा है कि पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक दुनिया इन दिनों एक अजीब बेचैनी से गुजर रही है. रंगमंच, संगीत और कला से जुड़े लोग, जो समाज को संवेदनशीलता और सौंदर्य का संदेश देते हैं, खुद असुरक्षा और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं. इसी दर्द और चिंता को शब्द देते हुए, प्रसिद्ध अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी जी ने लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखा.
उन्होंने अपने पत्र में बताया कि पश्चिम बंगाल में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों को अनुमति नहीं दी जा रही है. कलाकारों को मंच तक पहुंचने से रोका जा रहा है और जो कार्यक्रम तय भी होते हैं, उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती. इससे न सिर्फ कलाकारों का मनोबल टूटता है, बल्कि समाज के सांस्कृतिक ताने-बाने पर भी असर पड़ता है. कला हमेशा से लोगों को जोड़ने का माध्यम रही है, भाषा, धर्म और राजनीति से परे है, लेकिन जब कलाकार ही भय और असुरक्षा में जीने लगें, तो यह केवल एक राज्य का मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक आत्मा पर सवाल खड़ा करता है.
पत्र के मुख्य प्वाइंट क्या हैं?
- आपको गहरे दुःख, चिंता और असहायता की भावना के साथ पत्र लिख रही हूं.
- केवल एक सांसद के रूप में नहीं, बल्कि जिसने अपना पूरा जीवन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विशेषकर शास्त्रीय नृत्य के संरक्षण, प्रचार और अभ्यास के लिए समर्पित किया है.
- यह मेरा बचपन से ही जुनून रहा है और ईश्वर की कृपा से मुझे वर्षों तक इसे आगे बढ़ाने के अनेक अवसर प्राप्त हुए हैं. मेरे लिए संस्कृति हमेशा एक पवित्र कर्तव्य रही है.
- इसी कारण यह अत्यंत पीड़ादायक है कि पश्चिम बंगाल में एक बढ़ता हुआ सांस्कृतिक फासीवाद जैसा वातावरण दिखाई दे रहा है.
- यह अत्यंत विडंबनापूर्ण है क्योंकि पश्चिम बंगाल ऐतिहासिक रूप से कला, साहित्य और परिष्कृत सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का केंद्र रहा है. विशेषकर कोलकाता लंबे समय से बौद्धिक गहराई और कलात्मक उत्कृष्टता का प्रतीक रहा है.
- मैंने हमेशा पश्चिम बंगाल और कोलकाता के लोगों में संस्कृति के प्रति गहरी सराहना देखी है. हालांकि, हाल के सालों में हुए घटनाक्रमों ने देशभर के कलाकारों और सांस्कृतिक साधकों को गहरी पीड़ा दी है.
- हाल में हुए दुखद घटना का जिक्र करते हुए कहा है कि 15 मार्च को, हम कोलकाता के प्रतिष्ठित धोनो धान्यो ऑडिटोरियम में द्रौपदी डांस ड्रामा प्रस्तुत करने वाले थे. यह कार्यक्रम अंतिम समय में अचानक रद्द कर दिया गया और इसके लिए बार-बार बदलते और असंगत कारण बताए गए, जिनमें लॉजिस्टिक समस्याएं और चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला दिया गया.
- सबसे दुखद बात यह है कि पिछले कुछ सालों में पश्चिम बंगाल में एक निरंतर पैटर्न देखा गया है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनुमति या तो देर से दी जाती है या अंतिम समय में रद्द कर दी जाती है, जिससे कलाकारों और आयोजकों के लिए अनिश्चितता और व्यवधान उत्पन्न होता है.
- बंगाल में सुरक्षा और संरक्षण का मुद्दा भी उतना ही चिंताजनक है. पिछले आठ-नौ वर्षों में पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन करना लगातार भय और असुरक्षा का विषय बन गया है, क्योंकि पर्याप्त सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती.
- इसका प्रभाव केवल कलाकारों पर ही नहीं पड़ता, बल्कि उन अनेक कलाकारों की आजीविका पर भी पड़ता है, जो साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और ऐसे अवसरों पर निर्भर रहते हैं.
- यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है. मुझे दशकों से पूरे भारत में प्रदर्शन करने का सौभाग्य मिला है.
- मैं पांच बार की सांसद होने के बावजूद इस असुरक्षा और असहायता महसूस कर रही हूं, तो अन्य कलाकारों की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है.











