भारत-चिली व्यापार समझौता भारत को दिला सकता है रणनीतिक बढ़त, खनिज आपूर्ति होगी मजबूत

भारत और चिली के बीच व्यापक मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह समझौता भारत को लिथियम, तांबा, कोबाल्ट और मोलिब्डेनम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहद आवश्यक माने जाते हैं।

वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति अब केवल व्यापारिक विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ गई है। ऐसे में भारत के लिए इन संसाधनों तक स्थायी पहुंच एक बड़ी जरूरत बन चुकी है। चिली, लिथियम और तांबे जैसे खनिजों के बड़े भंडार के कारण इस क्षेत्र में प्रमुख देश माना जाता है।

भारत और चिली के बीच 2006 से प्रिफेरेंशियल ट्रेड समझौता लागू है, लेकिन अब दोनों देश इसे व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के रूप में विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रस्तावित समझौते में वस्तुओं के व्यापार के साथ-साथ डिजिटल सेवाएं, निवेश, एमएसएमई और महत्वपूर्ण खनिजों को भी शामिल किया जाएगा।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए कच्चे माल की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा और घरेलू विनिर्माण को मजबूती देगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और स्वच्छ ऊर्जा मिशन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

वर्ष 2024-25 में भारत और चिली के बीच व्यापार में असंतुलन देखा गया। भारत का निर्यात घटा, जबकि आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि नया समझौता इस असंतुलन को कम करने और भारत को मूल्य श्रृंखला में आगे बढ़ने का अवसर देगा।

सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियां भी चिली में निवेश बढ़ा रही हैं। कोल इंडिया लिमिटेड ने वहां खनिज परियोजनाओं के लिए कंपनी स्थापित करने की मंजूरी दी है। वहीं, भारतीय निजी कंपनियां भी तांबा और अन्य खनिजों की खोज में भागीदारी कर रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-चिली मुक्त व्यापार समझौता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थिति दिलाने के साथ-साथ भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को सुरक्षित करने में सहायक साबित हो सकता है।

close