इससे अच्छा सरकार हमें गोली मार दे’… JSSC CGL रद्द होने पर बोले पास होने वाले अभ्यर्थी

“मुझे तो मुख्यमंत्री ने ही नियुक्ति पत्र दिया था और अब उन्होंने ही मेरी नौकरी ले ली.” भारी बारिश के बीच झारखंड मंत्रालय के बाहर खड़े रघुवेंद्र इतना कहते ही भावुक हो जाते हैं. चतरा के रघुवेंद्र CGL परीक्षा पास कर के सचिवालय में काम कर रहे थे. लेकिन 17 अगस्त को वे नौकरी से बाहर हो गए. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर JSSC CGL रद्द करने का ऐलान किया. राघवेंद्र इससे पहले गया में टीचर की नौकरी कर रहे थे. वे वहां सोशल साइंस पढ़ते थे.

‘अब तो हम न घर के हैं, न घाट के’

वे बताते हैं, “जब सीजीएल भर्ती का परिणाम आया, तो उनके मन में यहां ज्वॉइन करने को लेकर आशंका थी. लेकिन 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती रद्द न करने का फैसला दिया तो मैंने 8 जनवरी को गया में टीचर के पद से रिजाइन कर दिया. भर्ती परीक्षाओं के लिए मेरी उम्र समाप्त हो गई है. अगर सरकार पहले ही रद्द करती तो हम ज्वाइन ही नहीं करते. अब तो हम न घर के हैं, न घाट के.

एक झटके में 2000 नौकरी चली गई

झारखंड के रांची में छात्रों के आंदोलन के 24वें दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC – CGL रद्द करने का ऐलान किया. उनके ऐलान से करीब 2 हजार लोगों की सरकारी नौकरी एक झटके में खत्म हो गई. ऐलान के बाद से ही वे सब प्रदर्शन कर रहे हैं. रांची में तेज बारिश के बीच सैकड़ों की संख्या में यह लोग झारखंड मंत्रालय के बाहर हैं.

कोडरमा के रहने वाले संदीप यादव निगरानी विभाग में कार्यरत थे. प्रोजेक्ट भवन के अपने कार्यालय में वे सुबह 10 से 6 तक रहते थे. आज उन्हें इसी दफ्तर में आने की अनुमति नहीं मिली. संदीप कहते हैं,”गार्ड ने मेरा आईडी कार्ड देखा और कहा कि हमें अंदर जाने की अनुमति नहीं है. पिछले साल के अंतिम दिन इस ऑफिस में पहली बार गए थे. परीक्षा पास की थी. किसी की कृपा पर नहीं गए थे लेकिन आज वहां जाने की अनुमति नहीं है. सरकार ने भीड़ के दबाव में यह फैसला किया है.

संदीप की शादी दो महीने पहले हुई थी. संदीप कहते हैं, “मैंने घर जाकर यही कहा कि आपने नौकरी देखकर शादी की थी. अब नौकरी नहीं है. आप चाहें तो यह रिश्ता खत्म कर सकती हैं.”

इससे अच्छा सरकार हमें गोली मार देती…

देवघर के ललन पांडे का चयन ASO के पद पर हुआ था. वे जमशेदपुर में पोस्टेड थे. ललन के परिवार में मां – पिता, उनकी पत्नी और उनके दो बच्चे हैं. ललन अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य हैं. वे कहते हैं, “अब किसी भर्ती में जाने की उम्र नहीं बची. मेरे छोटे – छोटे बच्चे हैं. उनकी पढ़ाई का क्या होगा? यह हमारे साथ सरासर नाइंसाफी है. इससे अच्छा सरकार हमें गोली मार देती.

गोली मारने की ही बात गुंजन सिंह भी करते हैं. वे कहते हैं, “नौकरी छीन कर सरकार ने हमें मार ही दिया है. तो इससे अच्छा है कि गोली मार दे. मैं आसनसोल डिवीजन में रेलवे में नौकरी कर रहा था. घर आने की चाह में इस नौकरी में आया. कौन घर नहीं आना चाहता?

गुंजन हर जांच के लिए तैयार हैं. वे नार्को टेस्ट तक के लिए तैयार हैं. वे कहते हैं, “हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आए थे. जब प्रेस ब्रीफिंग हुई,कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी अगर भर्ती रद्द हो रही है तो किस पर विश्वास करें?

क्या है पूरा मामला

JSSC – CGL शुरू से ही विवादों में थी. जनवरी 2024 में जब जेएसएससी सीजीएल की परीक्षा पहली बार आयोजित हुई तो पेपर लीक हो गया था और उसके बाद तुरंत यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी. आयोग ने सितंबर में दोबारा परीक्षा कराई लेकिन तब भी गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगे. CID की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को हजारीबाग, बोकारो, आसनसोल और यहाँ तक कि नेपाल ले जाकर 150 में से 120 प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए थे. मामला झारखंड हाई कोर्ट पहुंचा. कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई. दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने संदिग्ध कैंडिडेट को छोड़कर बाकियों को नियुक्ति देने का आदेश दिया. जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी भर्ती रद्द करने की मांग ठुकरा दी. चयनित अभ्यर्थी अब इसी फैसले का हवाला दे रहे हैं.

इस परीक्षा को रद्द करने, JPSC पीटी परीक्षा रद्द करने समेत कई मांगों को लेकर पिछले 25 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र आंदोलन कर रहे हैं. छात्रों के इसी गुट ने विधानसभा का घेराव किया था. और 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी दी थी. इससे पहले 17 अगस्त को सरकार ने भर्ती रद्द करने की मांग मान ली

आंदोलन की चेतावनी

जिन छात्रों की मांग पर यह भर्ती रद्द की गई उनके बारे में और आंदोलन के बारे में चयनित अभ्यर्थी क्या सोचते हैं. इस सवाल के जवाब में प्रिंस कहते हैं, “हमारा उनसे कोई बैर नहीं है. वे हमारे छोटे – बड़े भाई हैं. लक – लेबर – चांस का मसला है. किसी दिन उनका भी चयन हो सकता था.”

चयनित अभ्यर्थी भी अब आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं. वे आमरण अनशन की चेतावनी दे रहे और कोर्ट जाने की भी बात कर रहे. यानी हेमंत सरकार की मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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