RO के पानी से जुड़े बड़े मिथकों की जानिए सच्चाई, दूर होगी गलतफहमी

आजकल ज्यादातर घरों में पीने के लिए RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य पानी से अशुद्धियों और कुछ हानिकारक तत्वों को हटाकर उसे पीने योग्य बनाना होता है. हालांकि, RO के पानी को लेकर लोगों के बीच कई तरह की बातें और दावे भी सुनने को मिलते हैं. सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इससे जुड़ी कई जानकारियां मौजूद हैं, जिनकी वजह से लोगों में अक्सर भ्रम की स्थिति बन जाती है.

कुछ लोग मानते हैं कि RO का पानी सेहत के लिए हमेशा सबसे अच्छा होता है, जबकि कुछ का दावा है कि इससे शरीर को नुकसान हो सकता है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कौन-सी बातें वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित हैं और कौन-सी सिर्फ मिथक हैं. किसी भी जानकारी पर भरोसा करने से पहले विश्वसनीय सोर्स और विशेषज्ञों की राय जानना जरूरी होता है. आइए जानते हैं कि RO के पानी से जुड़े कौन-से आम मिथक लोगों के बीच प्रचलित हैं, उनकी सच्चाई क्या है और RO का पानी इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, RO जैसी प्रक्रियाओं से पानी में मौजूद कुछ मिनरल्स कम हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर में सभी जरूरी मिनरल्स की कमी हो जाएगी. अधिकांश लोगों को कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य जरूरी मिनरल्स का मुख्य सोर्स संतुलित डाइट होता है, केवल पीने का पानी नहीं.

मिथक 2: RO का पानी हर घर के लिए जरूरी होता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर घर में RO वॉटर प्यूरीफायर की जरूरत नहीं होती. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके क्षेत्र का पानी कितना साफ है और उसमें किस तरह की अशुद्धियां मौजूद हैं. अगर पानी की गुणवत्ता अच्छी है, तो हर स्थिति में RO की जरूरत नहीं होती. इसलिए पानी की जांच और उसकी गुणवत्ता के आधार पर ही सही वॉटर प्यूरीफायर का चुनाव करना चाहिए.

मिथक 3: RO का पानी पूरी तरह शुद्ध हो जाता है, इसलिए उसे जैसे-तैसे स्टोर कर सकते हैं

अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, सुरक्षित पानी को भी साफ और ढक्कन वाले कंटेनर में सही तरीके से स्टोर करना जरूरी है. गलत तरीके से स्टोर करने पर पानी दोबारा दूषित हो सकता है. इसलिए पानी को साफ रखने के साथ-साथ उसे सही तरीके से स्टोर करना भी जरूरी है.

मिथक 4: RO का पानी गट को कमजोर बना देता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की उपलब्ध गाइडलाइंस में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है कि RO का पानी सीधे गट को कमजोर बना देता है. गट हेल्थ कई कारणों, जैसे खानपान, फाइबर, लाइफस्टाइल, संक्रमण और दवाओं के इस्तेमाल पर निर्भर करती है. इसलिए इस दावे के समर्थन में फिलहाल पर्याप्त आधिकारिक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं.

किन परिस्थितियों में RO वॉटर प्यूरीफायर की जरूरत पड़ सकती है?

RO वॉटर प्यूरीफायर की जरूरत हर घर में नहीं होती. यह आपके इलाके के पानी की गुणवत्ता पर निर्भर करता है. अगर पानी में TDS बहुत ज्यादा हो या उसमें आर्सेनिक, फ्लोराइड, सीसा जैसे हानिकारक तत्व मौजूद हों, तो RO प्यूरीफायर उपयोगी हो सकता है.

वहीं, अगर नल का पानी पहले से सुरक्षित है और उसकी गुणवत्ता अच्छी है, तो हर घर में RO लगाना जरूरी नहीं होता. इसलिए पानी की जांच कराने के बाद ही अपनी जरूरत के अनुसार सही वॉटर प्यूरीफायर चुनना बेहतर होता है.

RO का पानी पीते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

RO वॉटर प्यूरीफायर की नियमित सर्विसिंग कराएं और समय पर उसका फिल्टर बदलवाएं, ताकि पानी साफ और सुरक्षित रहे. RO के पानी को हमेशा साफ और ढक्कन वाले बर्तन में रखें और लंबे समय तक खुला न छोड़ें.

शरीर को जरूरी मिनरल्स मुख्य रूप से भोजन से मिलते हैं, इसलिए संतुलित और पौष्टिक डाइट लेना भी जरूरी है. अगर आपको पानी की गुणवत्ता या सही वॉटर प्यूरीफायर को लेकर कोई संदेह हो, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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