बाथरूम से भागने का मास्टरप्लान: सरिया तोड़ी, छत चढ़े और खेतों में कूदे किशोर

इटावा : सिविल लाइन क्षेत्र स्थित सराय ऐसर राजकीय संप्रेक्षण गृह किशोर यूनिट-2 से दो बाल अपचारियों का फरार होना महज एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी नाकामी की कहानी बन गया है.शुक्रवार शाम करीब साढ़े पांच बजे दोनों किशोर बाथरूम में लगे लोहे के जंगले की सरिया तोड़कर छत तक पहुंचे और लगभग 35 फीट ऊंचाई से छलांग लगाते हुए बाउंड्री वॉल पार कर पीछे के खेतों में कूदकर फरार हो गए.
यह पूरा घटनाक्रम संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था को आईना दिखा गया है.जांच में खुलासा हुआ है कि फरारी की यह साजिश अचानक नहीं रची गई थी.दोनों किशोर लंबे समय से बाथरूम के जंगले की सरिया को धीरे-धीरे कमजोर कर रहे थे.पुलिस का मानना है कि सरिया एक दिन में नहीं टूटी, बल्कि कई दिनों तक योजनाबद्ध तरीके से इसे तोड़ा गया.
इसके बावजूद न किसी कर्मचारी ने संदेह जताया और न ही किसी अधिकारी ने सुरक्षा की समीक्षा की.
बताया जा रहा है कि फरारी की नींव नवंबर 2025 में ही रख दी गई थी.पॉस्को एक्ट में निरुद्ध किशोर ने सबसे पहले भागने की योजना बनाई, जिसमें जनवरी 2026 में चोरी के मामले में दाखिल 14 वर्षीय किशोर भी शामिल हो गया.
हैरानी की बात यह है कि छोटे किशोर के पैर में रॉड लगी होने के बावजूद दोनों ने जान जोखिम में डालकर ऊंचाई से छलांग लगाने में कोई हिचक नहीं दिखाई.
यह घटना संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा है.इतनी ऊंची छत तक पहुंचना, बाउंड्री वॉल पार करना और बिना किसी रोक-टोक के फरार हो जाना केवल निगरानी में चूक नहीं, बल्कि ड्यूटी में घोर लापरवाही को उजागर करता है.
सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि घटना के बाद शाम ढलने से पहले दोनों किशोरों को पकड़ने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम रहा.फरारी के बाद दोनों किशोर इटावा रेलवे जंक्शन पहुंचे.चोरी के मामले में निरुद्ध किशोर कानपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में सवार होकर निकल गया, जबकि पॉस्को एक्ट में दाखिल किशोर एक्सप्रेस ट्रेन के इंतजार में स्टेशन पर ही रुका रहा.
एक किशोर के पकड़े जाने की सूचना जरूर सामने आई है, लेकिन अब तक संप्रेक्षण गृह प्रशासन, जिला प्रोबेशन विभाग या पुलिस की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन इतनी बड़ी चूक के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है.
यह पूरा मामला सिस्टम पर बड़ा सवाल छोड़ गया है—क्या संप्रेक्षण गृह सुरक्षित हैं या फिर लापरवाही की दीवारों के पीछे ऐसी ही साजिशें पनपती रहेंगी? और सबसे अहम सवाल, इतनी गंभीर चूक के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?











