35 लाख में विदेश से MBBS की डिग्री का दावा, बिना क्लास-ट्रेनिंग पढ़ाई कराने वाले एजेंसियों का नेटवर्क

रायपुर में कुछ एजेंसियां उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और फिलीपींस से बिना नियमित कक्षाओं और क्लिनिकल ट्रेनिंग के MBBS कराने का दावा कर रही हैं। एजेंट छह साल की मेडिकल डिग्री के लिए करीब 30 से 35 लाख रुपए फीस मांग रहे हैं। वहीं, डिस्टेंस मोड के नाम पर 3 से 4 लाख रुपए अतिरिक्त लिए जाने की बात सामने आई है।

एजेंसियों के मुताबिक छात्रों को शुरुआत में सिर्फ एक महीने विदेश जाना होगा। इसके बाद हर साल परीक्षा देने के लिए विदेश जाने का दावा किया जा रहा है। कुछ एजेंट परीक्षा पास कराने की गारंटी तक देने की बात कह रहे हैं। नियमित उपस्थिति दिखाने के लिए सालाना करीब 50 हजार रुपए अतिरिक्त लेने का भी दावा किया गया है।

रायपुर में 50 से ज्यादा एजेंसियां सक्रिय

पड़ताल के दौरान रायपुर में ऐसी 50 से ज्यादा एजेंसियों के सक्रिय होने की बात सामने आई। इनमें से कई एजेंसियों ने मॉल और व्यावसायिक परिसरों में काउंसलिंग सेंटर बना रखे हैं। कुछ एजेंटों ने कई छात्रों को इसी तरह MBBS की डिग्री दिलाने का दावा किया।

हालांकि, कुछ एजेंसियों ने यह भी स्पष्ट किया कि डिस्टेंस मोड से MBBS कराना संभव नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक मेडिकल शिक्षा में नियमित कक्षाओं के साथ प्रैक्टिकल और क्लिनिकल ट्रेनिंग जरूरी होती है।

उपस्थिति के नाम पर भी पैसे लेने का दावा

एक एजेंसी संचालक ने दावा किया कि उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और फिलीपींस की यूनिवर्सिटी से इस तरह की व्यवस्था कराई जा सकती है। एजेंट के मुताबिक छात्र को शुरुआती औपचारिकताओं के लिए एक महीने विदेश में रहना होगा, इसके बाद केवल परीक्षा के लिए जाना पड़ेगा।

एजेंट ने यह भी दावा किया कि सालाना 50 हजार रुपए अतिरिक्त देने पर यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड में छात्र की नियमित उपस्थिति दर्ज कराई जाएगी। उसने छह से ज्यादा छात्रों को इसी तरह MBBS की डिग्री दिलाने की बात भी कही।

रेगुलर से महंगा बताया जा रहा डिस्टेंस MBBS

एक अन्य एजेंट ने बताया कि विदेश में रेगुलर MBBS के लिए करीब 30 से 35 लाख रुपए खर्च होंगे। वहीं, छात्र को विदेश में रखकर पढ़ाई नहीं कराने की स्थिति में डिस्टेंस व्यवस्था के लिए 3 से 4 लाख रुपए अतिरिक्त देने होंगे।

कुछ एजेंटों ने छात्रों को विदेश ले जाने की तैयारी होने की भी जानकारी दी। वहीं, एक एजेंट ने दावा किया कि पहले इस तरह की व्यवस्था कराई जा चुकी है, लेकिन इस बार नियमों में बदलाव हुआ है।

करिअर काउंसलिंग के नाम पर अभिभावकों तक पहुंच रहा नेटवर्क

यह पूरा नेटवर्क विदेश में पढ़ाई और करिअर काउंसलिंग के नाम पर संचालित होने की बात सामने आई है। रायपुर के वीआईपी चौक, शंकर नगर और पंडरी समेत कई इलाकों में ऐसे सेंटर बताए गए हैं। परिचितों और मोबाइल संदेशों के जरिए अभिभावकों तक विदेश में मेडिकल पढ़ाई के विज्ञापन पहुंचाए जाते हैं।

प्रदेश से बड़ी संख्या में छात्रों के मध्य एशियाई देशों में जाने का दावा किया जा रहा है। एजेंटों को छात्रों के दाखिले के बदले कमीशन मिलने की बात भी सामने आई है।

विशेषज्ञों ने डिस्टेंस MBBS पर उठाए सवाल

विशेषज्ञों का कहना है कि MBBS केवल किताबों से पूरी होने वाली पढ़ाई नहीं है। इसमें नियमित कक्षाओं, प्रैक्टिकल, क्लिनिकल ट्रेनिंग और मरीजों के बीच काम करने का अनुभव जरूरी होता है। ऐसे में बिना नियमित प्रशिक्षण के मेडिकल डिग्री हासिल करने की व्यवस्था मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने भी अभिभावकों से ऐसी एजेंसियों के झांसे में नहीं आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विदेश से मेडिकल शिक्षा लेने वाले छात्रों के लिए परीक्षा और इंटर्नशिप की व्यवस्था चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close