बच्चों में मिर्गी ही नहीं इन वजहों से भी पड़ सकता है दौरा, जानें एक्सपर्ट की राय

बच्चों में मिर्गी (Epilepsy in children) को आमतौर पर बार-बार आने वाले दौरों (Seizures in children) से जोड़ा जाता है, लेकिन हर बार दौरा पड़ना सिर्फ मिर्गी की वजह से ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कुछ बच्चों में दौरे दिमाग और नसों से जुड़ी किसी दूसरी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं. ऐसी समस्याओं को शुरुआती दौर में पहचानना आसान नहीं होता, क्योंकि इनके लक्षण सामान्य मिर्गी, बच्चे के विकास की धीमी गति, व्यवहार में बदलाव या ध्यान लगाने में परेशानी जैसे दिखाई दे सकते हैं. डॉ. सूफी रूमी (मेडिकल स्पोक्सपर्सन, जॉली हेल्थकेयर) का मानना है कि सही समय पर जानकारी और जागरूकता से बीमारी की पहचान और इलाज आसान हो जाता है.

यदि किसी बच्चे को इलाज के बाद भी बार-बार दौरे पड़ रहे हों, उसकी उम्र के अनुसार विकास नहीं हो रहा हो, शरीर में असामान्य हरकतें दिखाई दे रही हों या वह पहले सीखी हुई बातें और कौशल भूलने लगा हो, तो इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह लेकर गहराई से जांच कराना जरूरी होता है, ताकि दौरे पड़ने की असली वजह का पता लगाया जा सके और समय पर सही इलाज शुरू किया जा सके.

दौरा पड़ने की वजह कई हो सकती है, जैसे तेज बुखार, संक्रमण या शरीर की कोई दूसरी बीमारी. लेकिन अगर बच्चे को बार-बार दौरे पड़ें, अक्सर कुछ सेकंड तक खाली नजरों से देखने लगे, शरीर में अचानक झटके आएं, बिना वजह गिर जाए, दवाओं का असर कम दिखे या बहुत छोटी उम्र में ही दौरे शुरू हो जाएं, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए और डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. कुछ बच्चों में ऐसी समस्याएं बोलने, सीखने, चलने-फिरने, नींद, व्यवहार और पूरे विकास को भी प्रभावित कर सकती हैं.

कई बार माता-पिता सबसे पहले यह महसूस करते हैं कि बच्चा उम्र के अनुसार विकास नहीं कर रहा है या उसी उम्र के दूसरे बच्चों से अलग व्यवहार कर रहा है. ऐसे शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

कई बार असली वजह पहचानना क्यों हो जाता है मुश्किल

दौरे से जुड़ी कुछ दिमागी समस्याओं की पहचान करना आसान नहीं होता, क्योंकि इनके लक्षण अक्सर बहुत हल्के होते हैं या फिर दूसरी सामान्य बीमारियों जैसे दिखाई देते हैं. यही वजह है कि सही बीमारी का पता चलने से पहले कई परिवारों को अलग-अलग डॉक्टरों से सलाह लेनी पड़ती है. कुछ मामलों में बच्चे का इलाज तो चलता रहता है, लेकिन दौरे पड़ने की असली वजह सामने नहीं आ पाती. बीमारी की पहचान में देरी होने से परिवार की चिंता और तनाव बढ़ सकता है, साथ ही बच्चे के विकास और लंबे समय तक मिलने वाली देखभाल पर भी असर पड़ सकता है.

आज कई तरह की आधुनिक जांचें उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से डॉक्टर बीमारी को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं. समय पर सही पहचान होने से न केवल बीमारी के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलती है, बल्कि सही इलाज तय करने और परिवार को उचित सलाह देने में भी मदद मिलती है.

डर नहीं, जागरूकता है सबसे जरूरी

बच्चों में दौरे से जुड़ी ऐसी समस्याएं परिवारों के लिए चिंता का कारण बन सकती हैं, लेकिन समय रहते इनके संकेतों को पहचानना और सही इलाज शुरू करना बच्चे के भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकता है. इसका उद्देश्य केवल दौरों को नियंत्रित करना ही नहीं है, बल्कि बच्चे की पढ़ाई, सीखने की क्षमता, विकास और बेहतर जीवन को भी सुनिश्चित करना है. जॉली हेल्थकेयर का मानना है कि यदि किसी बच्चे में ऐसे लक्षण दिखाई दे रहे हों जो किसी गहरी समस्या की ओर इशारा करते हों, तो उसे केवल मिर्गी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

सही जानकारी, समय पर जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख से बीमारी की पहचान आसान हो सकती है. इससे परिवारों की चिंता कम होती है और वे बच्चे के बेहतर इलाज व देखभाल के साथ अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकते हैं.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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